अक्टूबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक करें बुवाई: सरसों की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का पहला सप्ताह सही समय माना जाता है. इस समय बुवाई करने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है और रोगों का खतरा भी कम हो सकता है.

बुवाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी करें: खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बना लें. इसके बाद पाटा चलाकर खेत को समतल करें, ताकि नमी बनी रहे और बीजों का जमाव एक जैसा हो.

उन्नत और उपचारित बीज का इस्तेमाल करें: किसान हमेशा अच्छी किस्म और उपचारित बीज ही चुनें. एक एकड़ में करीब 1.5 से 2 किलो बीज पर्याप्त रहता है. बीज को बहुत ज्यादा गहराई में बोने से बचें.

पौधों के बीच सही दूरी रखें: सरसों की बुवाई लाइन से करें और एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी करीब 30 सेंटीमीटर रखें. वहीं पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर और बीज की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर रखें.

नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की सही मात्रा दें: बुवाई के समय संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर का इस्तेमाल करें. खासकर सल्फर सरसों के दानों में तेल की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है और पौधों की बढ़वार भी बेहतर होती है.

सही तकनीक से घटेगी लागत, बढ़ेगी पैदावार: सही समय पर बुवाई, सही बीज दर, सही दूरी और संतुलित खाद का इस्तेमाल करने से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है. इससे फसल की बढ़वार अच्छी रहती है और किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.
Published at : 03 Oct 2026 06:14 PM (IST)






