120 से 135 दिन में तैयार हो जाती है फसल: सही मौसम, सिंचाई और देखभाल मिलने पर यह लहसुन की फसल करीब 4 से साढ़े 4 महीने में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है. जब पौधों की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें, तब फसल की खुदाई की जा सकती है.

अक्टूबर से नवंबर तक करें रोपाई: इस किस्म की रोपाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय बेहतर बताया गया है. खेत की मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए और पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है.

एक हेक्टेयर में 400 से 500 किलो बीज की जरूरत: इसकी खेती के लिए एक हेक्टेयर खेत में करीब 400 से 500 किलोग्राम बीज की जरूरत पड़ती है. रोपाई के लिए स्वस्थ और अच्छी क्वालिटी वाली लहसुन की कलियों का इस्तेमाल करना चाहिए.

पौधों और कतारों के बीच सही दूरी रखें: रोपाई के समय पौधों के बीच 15 सेंटीमीटर और एक कतार से दूसरी कतार के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए. इससे पौधों को अच्छी तरह बढ़ने की जगह मिलती है और खेत में निराई-गुड़ाई भी आसानी से की जा सकती है.

सही देखभाल से बेहतर उपज की उम्मीद: समय पर रोपाई के साथ खाद, सिंचाई और रोग-कीट से बचाव पर ध्यान देने से फसल का विकास बेहतर हो सकता है. किस्म का सही चुनाव भी लहसुन की उपज और क्वालिटी पर असर डालता है.

मसाला फसल से बढ़ सकती है किसानों की आमदनी: लहसुन की मांग बाजार में बनी रहती है, इसलिए किसान इसे अतिरिक्त कमाई के विकल्प के तौर पर अपना सकते हैं. हालांकि खेती शुरू करने से पहले अपने इलाके की मिट्टी और मौसम के हिसाब से कृषि विभाग से सलाह लेना बेहतर रहेगा.
Published at : 04 Oct 2026 02:39 PM (IST)






