एक ही पौधे से टमाटर और आलू: पोमैटो फार्मिंग की सबसे खास बात यह है कि एक ही पौधे के ऊपर टमाटर और नीचे जमीन के अंदर आलू उगते हैं. इससे किसान एक ही जगह से दो फसलों का उत्पादन ले सकता है और जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है.

ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार होता है पोमैटो: यह कोई अलग या नई किस्म नहीं है. इसमें टमाटर के पौधे के ऊपरी हिस्से को आलू के पौधे की जड़ से ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए जोड़ा जाता है. सही तरीके से जोड़ने के बाद दोनों एक ही पौधे की तरह बढ़ते हैं.

मिट्टी और पानी का सही प्रबंधन जरूरी: इस खेती के लिए खेत की मिट्टी भुरभुरी और पानी की अच्छी निकासी वाली होनी चाहिए. पौधे को जरूरत के हिसाब से पानी देना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा पानी से जड़ खराब हो सकती है. ड्रिप सिंचाई भी इसमें मददगार हो सकती है.

ऊपर टमाटर, नीचे बनते हैं आलू: पोमैटो पौधे में ऊपर की तरफ टमाटर के फूल और फल उगते हैं, जबकि जमीन के नीचे जड़ों में आलू बनते हैं. दोनों फसलों की जरूरत अलग होती है. इसलिए खाद, पानी और पौधे की देखभाल संतुलित तरीके से करनी पड़ती है.

टमाटर और आलू की कटाई अलग-अलग होती है: जब टमाटर पकने लगते हैं तो उन्हें धीरे-धीरे तोड़कर बाजार में भेजा जाता है. इसके बाद जब पौधा पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब जमीन खोदकर नीचे बने आलू निकाले जाते हैं. इस तरह एक पौधे से दो बार उत्पादन मिलता है.

कम जगह में दो फसलों का फायदा: पोमैटो फार्मिंग से एक ही जमीन पर दो फसलें लेने का मौका मिलता है, जिससे कम जगह में उत्पादन बढ़ाने की संभावना रहती है. हालांकि, इसकी ग्राफ्टिंग प्रक्रिया आसान नहीं है और किसान को सही तकनीक व देखभाल की जानकारी होना जरूरी है.
Published at : 04 Oct 2026 12:39 PM (IST)






