भारत ने पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल-डीजल, गैस का संकट देखा है. लेकिन अब लगता है कि साल की आखिरी तिमाही में देश में अब बिजली संकट भी देखने को मिल रहा है. जिसके चलते कई राज्यों ने एक्स्ट्रा बिजली की डिमांड भी की है. कोयले से बिजली का उत्पादन बढ़ने के बावजूद देश में बिजली की आपूर्ति मांग के मुताबिक नहीं हो पा रही है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत में बिजली की कमी बढ़कर 56 करोड़ यूनिट (560 मिलियन kWh) हो गई. अगस्त 2023 के बाद ये सबसे बड़ा बिजली संकट बताया गया है.
इन राज्यों में हो रही बिजली की कमी
देश के कई राज्य जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बिजली की कमी देखी जा रही है. जिसके चलते इन राज्यों ने बिजली की मांग पूरी करने के लिए केंद्र सरकार से एक्स्ट्रा बिजली मांगी है. खासकर रात के समय बिजली की कमी से बचने के लिए ये राज्य अतिरिक्त इंतजाम कर रहे हैं.
क्यों हो रही बिजली की कमी?
देश में बिजली की कमी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक कम बारिश है. क्यों इससे जलविद्युत उत्पादन घट गया है, जिसके कारण बिजली की कमी हो रही है. तो वहीं कोयले से बिजली का उत्पादन तो बढ़ा है, सितंबर में कोयले से बिजली उत्पादन 13.3% बढ़ा. लेकिन कोयले की लिमिटेड स्टॉक और बिजली संयंत्रों में रखरखाव के कारण मांग के हिसाब से बिजली की आपूर्ति करना मुश्किल हुआ.
ग्रिड इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के करीब 47% कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार बेहद कम था. इन संयंत्रों के पास निर्धारित जरूरत का एक-चौथाई से भी कम कोयला उपलब्ध था. तो वहीं इस साल मौसम का मिजाज भी कुछ बदला सा रहा. ऐसे में सामान्य से ज्यादा गर्म मौसम के कारण कूलर और एसी चलाने की जरूरत बढ़ी. वहीं खेतों में सिंचाई के लिए भी बिजली की मांग बनी रही.
बिजली संकट से निपटने के लिए क्या कर रही सरकार?
केंद्र सरकार और राज्य बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रहे हैं. केंद्र सरकार जरूरतमंद राज्यों को बिजली उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है. तो वहीं कोयले से घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा रहा है. सौर ऊर्जा से बनी बैटरी का स्टोरेज बढ़ाया जा रहा है, जिससे कि बिजली की कमी से राहत मिल सके.
जनता पर पड़ रहा असर
अगर बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना रहता है, तो कुछ राज्यों में लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, महंगी बिजली खरीदने से बिजली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर बिजली की आपूर्ति और कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है. हालांकि, इससे हर राज्य में बिजली की दरें तुरंत बढ़ेंगी, ये जरूरी नहीं है.
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