दरअसल संभल में एडिशनल एसपी के रूप में अपनी तैनाती के दौरान एक संदिग्ध मामले का खुलासा किया. उसने देशभर में सुर्खियां बटोरी थी. पुलिस जांच के दौरान एक संदिग्ध वाहन से भारी मात्रा में नकदी और 9 अलग-अलग लोगों के डेबिट कार्ड बरामद हुए थे, जिसके बाद इस गिरोह की परतें खुलती चली गई. यह गिरोह 12 राज्यों में फैला हुआ था. पुलिस ने 70 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया था. वहीं इसी पूरे मामले में अहम भूमिका निभाने के लिए अनुकृति शर्मा को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक मिल रहा है.

आपको बता दें कि आईपीएस बनने का अनुकृति का शुरुआती सफर भी आसान नहीं था. एकेडमिक मोर्चे पर उनका सफर बहुत शानदार था. उन्होंने जयपुर के इंडो-भारत इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई की और फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER), कोलकाता से BS-MS की डिग्री पूरी की.

2012 में उन्हें ह्यूस्टन, टेक्सास स्थित राइस यूनिवर्सिटी में पीएचडी कार्यक्रम में एडमिशन लिया. उनके रिसर्च कार्य ज्वालामुखी से जुड़ा था और इसी दौरान उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ काम करने का मौका मिला जहां वे रिसर्च के कार्य से जुड़ी हुई थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उस दौरान अमेरिका में वह काफी अच्छी कमाई कर रही थी. हालांकि एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने विदेश में वैज्ञानिक बनने का अपना सपना छोड़कर देश लौटने और सिविल सेवा में जाने का फैसला किया.

विदेश से लौट के बाद अनुकृति ने साल 2014 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की और 2015 में अपना पहला एग्जाम दिया. यूपीएससी में पहले अटेम्प्ट के बाद उन्हें शुरुआत में सफलता नहीं मिली. लेकिन असफलताओं से हताश हुए बिना, उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी.

2018 में उन्होंने अपना चौथे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 355 हासिल की और भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुनी गई. लेकिन उनका टारगेट आईपीएस अधिकारी बनने का था, इसलिए उन्होंने आईआरएस ज्वाइन नहीं किया. वहीं 2020 में अपने चौथे प्रयास में अनुकृति ने सफलता हासिल की. 2020 में उन्हें सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 138 हासिल की और उन्हें आईपीएस बनने के सपने को साकार किया और उत्तर प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी बनी.

वहीं संभल में तैनाती के दौरान उन्होंने केवल अपराधी गिरोह पर शिकंजा ही नहीं कसा, बल्कि पुलिस और आम जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने के लिए पुलिस माय फ्रेंड अभियान की शुरुआत की और जिले के सभी 15 स्थान में माता-पिता शिशु देखभाल कक्ष बनवाए. उनके इन उत्कृष्ट प्रशासनिक एवं सामाजिक कार्य के लिए उन्हें पहले डीजी प्रशंसा चिन्ह से भी नवाजा जा चुका है.
Published at : 05 Nov 2026 09:54 AM (IST)
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