दिवाली 2026: आयुष्मान योग और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

दिवाली 2026: आयुष्मान योग और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त


Diwali 2026: कार्तिक अमावस्या पर इस बार दीपावली महापर्व अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी संयोगों में मनाया जाएगा. जानिए पूजन की सटीक तिथियां, स्थिर लग्न और चौघड़िया मुहूर्त.

सनातन परंपरा में देवी लक्ष्मी को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है. दीपावली का पावन पर्व ऊर्जा और प्रकाश का उत्सव है, जिसे केवल हिंदू ही नहीं बल्कि बौद्ध, जैन और सिख समुदाय भी श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाते हैं. भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में यह पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.

कार्तिक माह की अमावस्या के इस पावन दिन पर मां लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है, ताकि उनकी कृपा से जीवन में स्थाई सुख-समृद्धि बनी रहे. धार्मिक मान्यता है कि जो जातक इस रात प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं, उनके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती. दीवाली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी की कृपा और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रतीक है. पूजन करते समय स्थान (घर अथवा व्यापारिक प्रतिष्ठान) का विशेष महत्व होता है, जिसके अनुसार अलग-अलग लग्न व मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं.

प्रदोष काल, रात्रि व्यापिनी व आयुष्मान योग का विशेष प्रभाव

प्रदोष काल में किया गया पूजन, साधना और अनुष्ठान विशेष फलदायी माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल भगवान शिव की साधना के लिए सर्वोत्तम समय है. प्रदोष तिथि माह में दो बार (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) आती है. इस समय भगवान शिव, प्रथम पूज्य गणेश जी, धन लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है. ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंदित होकर नृत्य करते हैं.

इस वर्ष दीपावली पर प्रदोष काल के साथ आयुष्मान योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. आयुष्मान योग अत्यंत मंगलकारी माना जाता है, जिसमें किए गए शुभ कार्य जैसे विवाह, नामकरण, नवीन शुरुआत तथा वित्तीय निवेश दीर्घकालिक सफलता प्रदान करते हैं. इस योग में मां लक्ष्मी का पूजन करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि की स्थायी वृद्धि होती है.

दीपावली 2026: तिथि एवं पूजन का संपूर्ण समय

दीपावली का महापर्व 08 नवंबर 2026, दिन रविवार को श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा.

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर 2026, सुबह 10:50 बजे से
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 09 नवंबर 2026, सुबह 11:20 बजे तक
  • आयुष्मान योग प्रारंभ: 08 नवंबर 2026, रविवार सुबह 05:20 बजे से
  • आयुष्मान योग समाप्त: 09 नवंबर 2026, सोमवार सुबह 07:28 बजे तक

स्थान के अनुसार लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त

पूजन का प्रकार / स्थान लग्न निर्धारित शुभ समय
व्यापारिक प्रतिष्ठान व दुकान स्थिर कुंभ लग्न दोपहर 01:00 बजे से दोपहर 02:31 बजे तक
घर में गृहस्थ लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल (स्थिर वृषभ लग्न) शाम 05:37 बजे से शाम 07:34 बजे तक
मंत्र सिद्धि व तांत्रिक साधना महानिशीथ काल (स्थिर सिंह लग्न) मध्यरात्रि 12:05 बजे से रात 02:19 बजे तक

गृहस्थों के लिए घर में लक्ष्मी पूजन का सबसे उत्तम समय प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न (शाम 05:37 से 07:34 बजे तक) रहेगा. स्थिर लग्न में पूजन करने से मां लक्ष्मी का घर में स्थायी वास होता है.

दीपोत्सव का वैज्ञानिक महत्व

दीपावली केवल धार्मिक आस्था और विश्वास का पर्व नहीं है, बल्कि इसका सुदृढ़ वैज्ञानिक आधार भी है. वर्षा ऋतु के समापन के बाद वातावरण में कई प्रकार के सूक्ष्म कीट-पतंगे और जीवाणु पनपते हैं. दीपावली की रात सरसों के तेल अथवा तिल के तेल के अनगिनत दीप जलाने से निकलने वाले ताप और धुएं से वातावरण शुद्ध होता है तथा मौसमी संक्रामक कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे गंभीर मौसमी बीमारियों के प्रसार पर रोक लगती है.

ज्योतिषीय दृष्टि से कैसा रहेगा साल 2026 का दीपोत्सव?

ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, वर्ष 2026 की दीपावली विशेषकर व्यापार और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत अनुकूल रहने वाली है. आयुष्मान योग का संयोग होने से नए व्यवसाय की शुरुआत करने अथवा पुराने व्यापार में पूंजी निवेश की योजना बना रहे लोगों को उत्तम धन लाभ होगा. करियर, आजीविका और आर्थिक उन्नति से जुड़े उपाय करने के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ साबित होगा.

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