HP-BP और इंडियन ऑयल पर बोली सरकार- 893 सैंपल की जांच में सब पास

HP-BP और इंडियन ऑयल पर बोली सरकार- 893 सैंपल की जांच में सब पास


इन दिनों देश में ई20 पेट्रोल पर काफी बवाल चल रहा है. हाल ही में कर्नाटक में पेट्रोल के सैम्पल की जींच हई जिसमें गड़बड़ी की बात सामने आई. जिसके बाद अब इस विवाद के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि सरकारी तेल कंपनियों की ओर से सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार है.

मंत्रालय के मुताबिक, इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पेट्रोल के 893 सैम्पल लेकर जांच की. सभी सैम्पल्स में एथेनॉल की मात्रा तय लिमिट के अनुसार पाई गई.

मंत्रालय ने जारी किया बयान
दरअसल इस विवाद के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है. और कहा है कि, सरकारी तेल कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल के 893 सैम्पल्स चेक किए हैं. इनमें एथेनॉल की मात्रा 19% से 21% के बीच पाई गई. कर्नाटक से भी 56 सैम्पल लिए गए थे. इन सभी में एथेनॉल की मात्रा 19% से 20% के बीच मिली. इन सैम्पल्स में एथेनॉल की औसत मात्रा 19.30% रही. मंत्रालय का कहना है कि ये आंकड़े कर्नाटक सरकार के उस दावे से अलग हैं, जिसमें कुछ पेट्रोल पंपों पर ज्यादा एथेनॉल मिलने की बात कही गई थी. 

सरकार और तेल कंपनियों के दावे अलग-अलग
कर्नाटक सरकार ने अक्टूबर 2026 में कुछ पेट्रोल पंपों से सैम्पल लेकर जांच कराई थी. सरकार का दावा था कि कुछ नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 26% से 31% तक मिली. इसके बाद सरकारी तेल कंपनियों ने जांच के तरीके पर सवाल उठाए. 

कंपनियों का कहना है कि नमूने लेते समय उनके प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे. उन्हें जांच की पूरी रिपोर्ट और सैम्पल्स की दूसरी कॉपीज भी नहीं मिलीं. तेल कंपनियों ने मांग की है कि राज्य सरकार के साथ मिलकर दोबारा जांच कराई जाए, ताकि सही स्थिति सामने आ सके.

E20 से कम हो सकता है माइलेज?
E20 पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों के मन में माइलेज कम होने और इंजन को नुकसान पहुंचने की आशंका भी है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इसका असर गाड़ी के मॉडल और इंजन की बनावट पर निर्भर करता है. मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, E20 के लिए तैयार गाड़ियों में माइलेज करीब 1% से 2% तक कम हो सकता है. अन्य वाहनों में माइलेज 3% से 6% तक घट सकता है. हालांकि सभी वाहनों में एक समान 10% माइलेज कम होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है.

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