Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी का दिन हर मां के लिए बहुत खास होता है. इस दिन माताएं दिनभर निर्जला उपवास रखकर अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और तरक्की की प्रार्थना करती हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित गोवर्धन का राधाकुंड इस रात एक अलग ही आस्था और उम्मीद का गवाह बनता है.
1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी (बहुलाष्टमी) के मौके पर यहां एक विशाल मेला लगने जा रहा है, जहां देश के कोने-कोने से हजारों निसंतान दंपती अपनी सूनी गोद भरने की आस लेकर पहुंचेंगे.
आधी रात को ही डुबकी क्यों लगाते हैं दंपती?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में राधाकुंड के पवित्र जल में स्नान करने से निसंतान जोड़ों को संतान सुख की प्राप्ति होती है. लोगों का ऐसा मनाना है कि, कुंडली में मौजूद किसी भी तरह का संतान दोष या जीवन में आ रही रुकावटें इस एक स्नान से दूर हो जाती हैं. वहीं, जिन लोगों के पहले से बच्चे हैं, वे भी अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और खुशहाली के लिए यहां हाजिरी लगाते हैं.
इस परंपरा के पीछे द्वापर युग की एक रोचक कथा जुड़ी है. जब भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के भेजे असुर अरिष्टासुर (जो बैल के रूप में आया था) का वध किया, तो राधा रानी ने उनसे कहा कि उन्होंने गोवंश का वध किया है, इसलिए उन्हें प्रायश्चित्त करना चाहिए. इसके बाद कान्हा ने अपनी बांसुरी से ‘श्याम कुंड’ खोदा और सभी तीर्थों के पावन जल को उसमें बुलाया.
राधा जी ने भी पास में ही अपने कंगन से ‘राधाकुंड’ तैयार किया. दोनों कुंडों के बनने के बाद भगवान कृष्ण ने राधाकुंड को यह वरदान दिया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात को जो भी भक्त इसमें श्रद्धा से डुबकी लगाएगा, उस पर राधा-कृष्ण की असीम कृपा बरसेगी और उसकी हर मनोकामना पूरी होगी.
स्नान और पूजा से जुड़े 4 जरूरी नियम:
राधाकुंड में स्नान केवल पानी में उतरना नहीं है, बल्कि इसके कुछ तय नियम हैं जिनका पालन श्रद्धालु पूरी निष्ठा से करते हैं:
हाथ पकड़कर साथ में स्नान: संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए पति और पत्नी का एक साथ हाथ पकड़कर डुबकी लगाना जरूरी माना जाता है. अकेला स्नान करने पर यह मन्नत अधूरी मानी जाती है.
पेठे (कुष्मांड) का दान: पानी में खड़े होकर पूजा करने के बाद दंपती लाल कपड़े में लिपटा कच्चा सफेद कद्दू (पेठा फल) राधाकुंड के जल में प्रवाहित करते हैं.
मन्नत पूरी होने पर शुक्रिया: जिन जोड़ों की मुराद पूरी हो जाती है, वे अगले वर्षों में अपने बच्चे को साथ लेकर राधा रानी के दर्शन करने और उनका आभार जताने फिर आते हैं.
शुचिता का पूरा ध्यान: आस्था के इस केंद्र पर जल की स्वच्छता बनाए रखने के लिए साबुन, शैम्पू या तेल का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है.
1 नवंबर 2026: स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त:
- अष्टमी तिथि की शुरुआत- दोपहर 02:51 बजे से
- अहोई माता की शाम की पूजा- शाम 05:36 से 06:54 बजे तक
- तारों को देखकर अर्घ्य देना- शाम लगभग 06:00 बजे
- राधाकुंड मध्यरात्रि मुख्य स्नान- रात 11:37 से देर रात 12:29 बजे तक (कुल 52 मिनट)
- अष्टमी तिथि का समापन- 2 नवंबर, दोपहर 01:10 बजे
प्रशासन के सुरक्षा और सुविधा के खास इंतजाम:
मेले में लाखों श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए गोवर्धन नगर पंचायत ने पुख्ता व्यवस्था की है. कुंड में सुरक्षा के लिए मजबूत बल्लियों की बैरिकेडिंग की गई है और आपात स्थिति से निपटने के लिए 20 गोताखोर व 2 मोटर बोट लगातार तैनात रहेंगी.
पूरे परिसर पर 40 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से नजर रखी जा रही है. भक्तों की सुविधा के लिए 5 बड़ी एलईडी स्क्रीन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम भी लगाए गए हैं.
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