Apara Ekadashi 2026: आज 13 मई 2026 को पूरे देश में अपरा एकादशी का पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. हमारे धर्म शास्त्रों में वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है. इसे ‘अचला एकादशी’ भी कहते हैं, जिसका अर्थ है वह पुण्य जो कभी नष्ट न हो और हमेशा स्थिर रहे.
आज के इस दौर में जहां हर इंसान अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी न किसी मानसिक तनाव या आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, अपरा एकादशी एक ‘रीसेट बटन’ की तरह काम करती है. यह दिन हमें मौका देता है कि हम अपने अतीत की गलतियों को सुधारें और एक नई, सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन की शुरुआत करें. आज का यह लेख आपके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें हमने उस गुप्त रहस्य को शामिल किया है जो आपकी किस्मत के बंद दरवाजे खोल सकता है.
राजा महीध्वज की अनसुनी कहानी: जब एक ‘प्रेत’ को मिला स्वर्ग का सुख
अपरा एकादशी का संबंध एक ऐसी प्राचीन कथा से है जो आज भी हमें कर्मों के फल के बारे में सोचने पर मजबूर कर देती है. कथा के अनुसार, धर्मात्मा राजा महीध्वज को उनके छोटे भाई वज्रध्वज ने मार कर एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया था. अकाल मृत्यु के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर उसी पेड़ पर भटकने लगी और राहगीरों को परेशान करने लगी.
राजा को इस कष्ट से तब मुक्ति मिली जब धौम्य ऋषि ने उनके लिए अपरा एकादशी का व्रत रखा और उसका पुण्य राजा को दान कर दिया. यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और दूसरों के लिए किया गया पुण्य किसी भी सोई हुई किस्मत को जगा सकता है और भटकती हुई आत्मा को भी शांति दिला सकता है. राजा को इसी व्रत की शक्ति से वह सुख मिला जो बड़े-बड़े यज्ञों से भी दुर्लभ था.
आज का शुभ मुहूर्त और पंचांग: भूलकर भी न करें समय की यह चूक
आज 13 मई 2026, बुधवार के दिन अपरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. अगर आप इस दिन का पूरा लाभ लेना चाहते हैं, तो पूजा के समय का विशेष ध्यान रखें. आज पूजा का सबसे उत्तम समय दोपहर 11.51 से 12.45 तक है, जिसे अभिजीत मुहूर्त कहा जाता है.
हालांकि, दोपहर 12.18 से 01.59 तक राहुकाल रहेगा, जिसमें कोई भी नया या शुभ काम शुरू करना वर्जित माना गया है. व्रत रखने वाले भक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि कल यानी 14 मई को व्रत खोलने का समय सुबह 05.32 से 08.14 के बीच ही है. सही समय पर किया गया पारण ही आपके व्रत को सफल बनाता है और भगवान विष्णु की अपार कृपा दिलाता है. कल गुरुवार का दिन होने के कारण विष्णु जी की विशेष कृपा बरसेगी और दान-पुण्य का फल भी कई गुना बढ़ जाएगा.
20 मिलियन व्यूज वाला ‘गुप्त हैक’: धन और सुख के लिए आज क्या करें?
गांव और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए अपरा एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि दरिद्रता दूर करने का एक सुनहरा मौका है. शास्त्रों में लिखा है कि जो फल कार्तिक मास में गंगा स्नान करने से मिलता है, वही फल आज के दिन किसी जरूरतमंद को पानी का घड़ा या पीले फल दान करने से मिल जाता है.
अगर आप कर्ज से परेशान हैं या घर में बरकत नहीं हो रही है, तो आज शाम को पीपल के पेड़ के नीचे एक दीपक जलाकर भगवान विष्णु के ‘त्रिविक्रम’ रूप का ध्यान जरूर करें. मान्यता है कि आज के दिन किया गया ‘गुप्त दान’ और ‘मौन व्रत’ इंसान के सात जन्मों के पापों को काट देता है और घर में लक्ष्मी का स्थायी वास बनाता है. यह छोटा सा कदम भी आपको बड़े संकटों से निकाल सकता है.
शास्त्रों में अपरा एकादशी के दिन कुछ सख्त नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन हर किसी को करना चाहिए. आज के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चावल में जल तत्व अधिक होता है और इसे खाने से मन विचलित होता है. इसके अलावा, आज के दिन किसी की बुराई करना, झूठ बोलना या किसी को धोखा देना आपके पुण्यों को खत्म कर सकता है.
अपरा एकादशी का व्रत हमें सिखाता है कि केवल पेट भूखा रखना उपवास नहीं है, बल्कि अपनी वाणी और विचारों को शुद्ध रखना ही असली तपस्या है. जो मनुष्य आज के दिन अपनी इंद्रियों पर काबू रखता है, उसे अनजाने में हुए पापों से भी मुक्ति मिल जाती है और मन में शांति का संचार होता है.
अंत में, यह समझना जरूरी है कि ‘अपरा’ का अर्थ है ‘अपार’. जो इंसान आज के दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की शरण में जाता है, उसे अपार धन, अपार यश और अपार सुख की प्राप्ति होती है. अगर आप व्रत नहीं भी रख पा रहे हैं, तो आज कम से कम किसी की निंदा न करें और किसी बेसहारा व्यक्ति या पशु की मदद कर दें.
यह दिन केवल कर्मकांड का नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम का भी है. विश्वास रखें कि राजा महीध्वज की तरह आपकी भी हर बाधा आज दूर होगी और आपके घर में सुख-शांति का वास होगा.
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