Hera Panchami 2026: 19 या 20 जुलाई में से कौन-सी है सही तारीख? जानिए सही तिथि

Hera Panchami 2026: 19 या 20 जुलाई में से कौन-सी है सही तारीख? जानिए सही तिथि


Hera Panchami 2026: ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा पूरे विश्व में मशहूर है और इस साल यह रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से शुरू होगी.  इस रथ यात्रा में पंचमी तिथि को हेरा पंचमी मनाई जाती है. हेरा पंचमी आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. लेकिन इस वर्ष इस तिथि को लेकर काफी कंफ्यूजन लोगों में दिख रहा है कि इस वर्ष यह तिथि 19 जुलाई को है या 20 जुलाई को? 

हिंदू पंचांग के अनुसार, हेरा पंचमी को मुख्य रूप से 19 जुलाई रविवार को मनाया जाएगा. 

क्या है हेरा पंचमी?

हेरा पंचमी पुरी में होने वाली दिव्य जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण उत्सव है. हेरा शब्द को ओड़िया भाषा में देखना या निहारना कहते हैं और पंचमी का अर्थ पांचवा दिन होता है. यह पर्व रथ यात्रा के शुरू होने के ठीक पांचवे दिन बनाए मनाया जाता है. 

मान्यता है कि जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर अपनी मौसी के घर जाते हैं. तो वह अपनी पत्नी माता लक्ष्मी को बिना बताए चले जाते हैं. कई दिनों तक जब भगवान वापस मुख्य मंदिर नहीं लौटते हैं, तो माता लक्ष्मी क्रोधित हो जाती है और उन्हें ढूंढने के लिए और वापस बुलाने के लिए गुंडिचा मंदिर जाती है. जिस दिन वह गुंडिचा मंदिर जाती है उसे दिन को हेरा पंचमी के रूप में मनाया जाता है.

गुंडिचा मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं

गर्भगृह के दक्षिण-पूर्व में स्थित पवित्र बरगद के वृक्ष के पास ले जाने से होती है, जहां उन्हें एक विशेष पालकी पर विराजित किया जाता है. इसके बाद बिमानाबादु सेवक इस पालकी को अपने कंधों पर उठाकर एक भव्य जुलूस निकालते हैं, जिसमें रंग-बिरंगी छतरियां, पंखे और क्षेत्र के अन्य मंदिरों की महत्वपूर्ण वस्तुएं शामिल होती हैं.

इस पूरी शोभायात्रा के दौरान पारंपरिक ढोल और घंटों की गूंज के बीच भक्त हेरा पंचमी गीत गाते हैं, जो माता लक्ष्मी के विरह और उनके प्रेमपूर्ण क्रोध को खूबसूरती से व्यक्त करते हैं. जब यह पालकी गुंडिचा मंदिर पहुँचती है, तो यह भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष के समीप रुकती है, जहाँ मुख्य पुजारी देवी की ओर से देवताओं की आरती करते हैं.

शाम की संधा धूप की रस्म के बाद माता मंदिर के भीतर प्रवेश करती हैं, जहां एक पुजारी भगवान जगन्नाथ की मूर्ति से आज्ञा माला लेकर उन्हें अर्पित करते हैं, जो भगवान की ओर से उन्हें मनाने एक तरीका है. अखिर में नाका चना द्वार पर मंदिर के पुजारी द्वारा दही अर्पित कर माता की पूजा की जाती है, जिसके बाद वे एक गुप्त रास्ते से वापस श्री मंदिर लौट आती हैं.

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