Kamalgatta Mala: कमलगट्टा माला से कैसे आकर्षित होती हैं मां लक्ष्मी? जानिए पूजा के विधि और स्थि

Kamalgatta Mala: कमलगट्टा माला से कैसे आकर्षित होती हैं मां लक्ष्मी? जानिए पूजा के विधि और स्थि


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  • कमलगट्टे की माला धन-वैभव और आर्थिक समृद्धि देती है।
  • माला शुद्ध, 100-108 मनकों की, प्राण प्रतिष्ठित हो।
  • बुधवार को माला का शुद्धिकरण, अभिषेक, केसर तिलक करें।
  • स्थिर लक्ष्मी मंत्र का 10,000 बार जाप करें।

Kamalgatta Mala: भारतीय सनातन परंपरा में मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है. हर व्यक्ति की यह अभिलाषा होती है कि उसके घर में लक्ष्मी का वास स्थायी हो और आर्थिक तंगी कभी बाधा न बने. शास्त्रों और तांत्रिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई मार्ग बताए गए हैं, जिनमें कमलगट्टे की माला का प्रयोग अत्यंत चमत्कारिक और प्रभावशाली माना जाता है.

कमलगट्टा माला का आध्यात्मिक महत्व

कमल का पुष्प देवी लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय आसन और प्रतीक है. कमलगट्टा, दरअसल कमल के फूल के बीज होते हैं. मान्यता है कि इन बीजों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो वातावरण से नकारात्मकता को दूर कर आर्थिक संपन्नता के द्वार खोलता है. विशेषकर शुक्रवार, दीपावली और पूर्णिमा जैसे शुभ अवसरों पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.

साधना के अनिवार्य नियम और तैयारी

सफलतापूर्वक मंत्र सिद्धि के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना आवश्यक है:

माला का चयन

  • शुद्धता: साधना के लिए सदैव ‘मंत्र सिद्ध’ और ‘प्राण प्रतिष्ठित’ कमलगट्टा माला का ही चयन करें.
  • संख्या: माला में मनकों (दानों) की संख्या 100 से 108 के बीच होनी चाहिए.

शुद्धिकरण और अभिषेक

साधना आरंभ करने से पूर्व माला को जागृत करना आवश्यक है:

  • दिन: किसी भी बुधवार के दिन यह प्रक्रिया करें.
  • विधि: माला को पहले शुद्ध जल से, फिर कच्चे दूध से और पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं.
  • श्रृंगार: साफ कपड़े से पोंछकर माला पर केसर का तिलक लगाएं और संभव हो तो गुलाब का इत्र अर्पित करें.

स्थापना और संकल्प

  • मां लक्ष्मी की एक सुंदर प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • उनके समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें.
  • हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए साधना का संकल्प लें.

मंत्र सिद्धि की प्रक्रिया

देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए ‘स्थिर लक्ष्मी’ मंत्र का जाप किया जाता है.

साधना मंत्र:

“ॐ स्वर्णावतिमहाभगवती कामरूपिणि मम कार्य सिद्धि करि करि असीमित द्रव्य स्थिर लक्ष्म्यै नमः”

सिद्धि के नियम:

  • संख्या: मंत्र को सिद्ध करने के लिए कुल 10,000 (दस हजार) बार जाप करना अनिवार्य है.
  • यदि आपकी माला 100 दानों की है, तो कुल 100 माला पूर्ण करने पर मंत्र सिद्ध हो जाता है.
  • अर्पण: जाप पूर्ण होने के पश्चात, उस माला को स्वयं धारण न करें. उसे मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को पहना दें.
  • विशेष सावधानी: एक बार मां लक्ष्मी को अर्पित करने के बाद उस माला का पुनः जाप के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए. वह माला सदैव मां के गले में ही शोभायमान रहनी चाहिए.

साधना का फल

जब पूर्ण श्रद्धा, एकाग्रता और विश्वास के साथ यह साधना संपन्न की जाती है, तो साधक को ‘स्थिर लक्ष्मी’ का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसका अर्थ यह है कि धन केवल आता ही नहीं, बल्कि घर में ठहरता भी है. आय के नए स्रोत खुलते हैं, कर्ज से मुक्ति मिलती है और परिवार में मानसिक शांति के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधाओं का विस्तार होता है.

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