Shree Yantra Mantra: सनातन धर्म और तंत्र शास्त्र में श्री यंत्र को अत्यंत दिव्य और चमत्कारी यंत्र माना गया है. इस मंत्र को माता महात्रिपुरसुंदरी का स्वरूप कहा जाता है. मान्यता है, कि जिस स्थान पर विधिपूर्वक श्री यंत्र की स्थापना और पूजा की जाती है, वहां सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. लेकिन केवल श्री यंत्र को घर में रखने से ही इसका पूरा लाभ नहीं मिलता है. इस मंत्र को जागृत या सक्रिय करने के लिए मंत्र साधना का विशेष महत्व बताया गया है.
श्री यंत्र को सक्रिय करने के लिए सबसे प्रभावशाली मंत्र यह माना जाता है:-
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महात्रिपुरसुन्दर्यै नमः
यह मंत्र देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी को समर्पित है और इसे श्रीविद्या साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्र बताया गया है. इसके अलावा उच्च स्तर की साधना में पंचदशी और षोडशाक्षरी मंत्रों का भी प्रयोग किया जाता है, लेकिन इन्हें गुरु दीक्षा के बाद ही जपने योग्य माना गया है.
श्री यंत्र केवल एक ज्यामितीय (Geometric) आकृति नहीं, बल्कि देवी शक्ति का साकार रूप है. इसमें बने त्रिकोण, बिंदु, अष्टदल और षोडशदल ब्रह्मांड की विभिन्न शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं. जब साधक श्रद्धा और नियमपूर्वक मंत्र जप करता है, तब इन शक्तियों का जागरण धीरे-धीरे होने लगता है. यही प्रक्रिया श्री यंत्र के सक्रिय होने की मानी जाती है.
शास्त्रों के अनुसार “श्रीं”, “ह्रीं” और “क्लीं” बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली ध्वनियां हैं:
श्रीं को धन, समृद्धि और माता लक्ष्मी का बीज माना जाता है.
ह्रीं को शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक कहा गया है.
क्लीं आकर्षण और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला बीज मंत्र माना जाता है.
इन तीनों बीज मंत्रों के मेल से बना यह मंत्र साधक के मन, बुद्धि और वातावरण को सकारात्मक बनाने में मदद करता है.
श्री यंत्र को सक्रिय करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना भी है जरूरी:
- प्रतिदिन स्नान के बाद शुद्ध स्थान पर पूजा करें.
- श्री यंत्र को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करें.
- घी का दीपक और चंदन-अक्षत अर्पित करें.
- कमलगट्टे या स्फटिक की माला से मंत्र जप करें.
- मन को एकाग्र रखकर देवी ललिता का ध्यान करें.
श्री यंत्र की साधना से मन, बुद्धि और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त होता है, और साधक को धन, शांति, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है.
यदि कोई व्यक्ति रोजाना नियमित रूप से 108 बार इस मंत्र का जप करें, तो व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने लगती है. कई लोग इसे आर्थिक उन्नति और कार्यों में सफलता से भी जोड़कर देखते हैं. हालांकि शास्त्रों में साफ कहा गया है कि, श्री यंत्र साधना का मतलब केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मिक विकास और देवी कृपा प्राप्त करना भी है.
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