UPI पर चार्ज कानूनी है या नहीं? कोर्ट में चुनौती के बाद NPCI ने क्या बताया?

UPI पर चार्ज कानूनी है या नहीं? कोर्ट में चुनौती के बाद NPCI ने क्या बताया?


अगर आप दुकान, मॉल या किसी दूसरे कारोबारी स्थान पर UPI के जरिए पेमेंट करते हैं, तो इससे जुड़ा एक मामला इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय है. सवाल यह है कि क्या UPI से पैसे लेने वाले कारोबारियों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जा सकता है? नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. NPCI का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने और बनाए रखने के लिए यह चार्ज जरूरी है.

यह मामला सिर्फ UPI पेमेंट पर लगने वाली फीस तक सीमित नहीं है. इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि क्या मौजूदा कानून के तहत NPCI को कारोबारियों से यह चार्ज लेने का अधिकार है और क्या इसे लागू करने का तरीका कानूनी है.

UPI पर कब लगेगा MDR चार्ज?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह फीस है, जो कारोबारीयों को डिजिटल पेमेंट की सुविधा इस्तेमाल करने के बदले देते हैं. यह रकम पेमेंट से जुड़ी अलग-अलग सेवाएं देने वाले बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटी जाती है. नए नियमों के तहत, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर पर किसी भी रकम के लिए चार्ज नहीं लगेगा. वहीं, 2,000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट भी फ्री रहेंगे. इसके अलावा, UPI QR कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक पेमेंट पाने वाले पात्र छोटे कारोबारियों को भी MDR से छूट दी गई है.

हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR तय किया गया है. 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी. कुछ सेक्टर में 5 रुपये का फ्लैट चार्ज और कैपिटल मार्केट से जुड़े ट्रांजैक्शन पर 0.02% की अलग दर लागू होगी. वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर इस व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट में क्या सवाल उठाए?

वकील अंजन दत्ता की ओर से दाखिल याचिका में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के बदले गए सेक्शन 10A और केंद्र के नोटिफिकेशन को चुनौती दी है. इसके साथ ही केंद्र के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क पर भी सवाल उठाए गए हैं.

उनका सवाल है कि सरकार को यह तय करने का अधिकार कैसे मिला कि किन डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगेगा और किन पर नहीं. हालांकि, याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के साथ अलग-अलग व्यवहार पर भी आपत्ति जताई गई है.

NPCI ने अपने बचावमें क्या कहा?

NPCI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा है कि PSS एक्ट के सेक्शन 20 और 21 के तहत उसे अपने पेमेंट सिस्टम की शर्तें तय करने का अधिकार देते हैं. इसमें लागू होने वाले चार्ज भी शामिल हैं. उसने यह भी कहा कि MDR कोई टैक्स नहीं, बल्कि डिजिटल पेमेंट सेवाओं के बदले लिया जाने वाला व्यवसायिक चार्ज है.

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