WhatsApp नहीं, Telegram पर ही क्यों हुई डिजिटल स्ट्राइक? जानिए कैसे काम करता है इसका सिस्टम

WhatsApp नहीं, Telegram पर ही क्यों हुई डिजिटल स्ट्राइक? जानिए कैसे काम करता है इसका सिस्टम


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  • भारत सरकार ने नीट परीक्षा को लेकर टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया।
  • टेलीग्राम की बड़ी समूह क्षमता और फाइल शेयरिंग दुरुपयोग का कारण बनी।
  • यह क्लाउड-आधारित है, व्हाट्सएप की तुलना में अलग कार्य करता है।

Telegram Ban in India: भारत समेत कई देशों में मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. दोस्तों और परिवार से बातचीत से लेकर पढ़ाई, बिजनेस और बड़ी-बड़ी कम्युनिटीज तक, सब कुछ अब मोबाइल ऐप्स पर निर्भर हो गया है.

लेकिन आज भारत सरकार ने नीट की परिक्षा को लेकर Telegram पर बड़ी कार्रवाई की है. सरकार ने इस ऐप पर बैन लगा दिया है. अब ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर WhatsApp की बजाय Telegram ही निशाने पर क्यों आया? इसके पीछे Telegram के काम करने के तरीके और उसके खास फीचर्स की बड़ी भूमिका है.

Telegram को लेकर क्यों उठे सवाल?

Telegram को उसकी तेज स्पीड, बड़े ग्रुप्स और फाइल शेयरिंग की क्षमता के लिए जाना जाता है. जहां WhatsApp में ग्रुप और चैनल की कुछ सीमाएं होती हैं, वहीं Telegram पर लाखों लोगों तक एक साथ जानकारी पहुंचाई जा सकती है.

यही वजह है कि कई बार कुछ लोग इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गलत गतिविधियों के लिए भी करने लगते हैं. बड़े सार्वजनिक चैनल, अनलिमिटेड फाइल शेयरिंग जैसे फीचर्स के कारण अवैध सामग्री या संवेदनशील जानकारी तेजी से फैल सकती है. ऐसे मामलों में प्रशासन की नजर सबसे पहले Telegram पर जाती है.

Telegram का सिस्टम कैसे काम करता है?

Telegram एक क्लाउड-बेस्ड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है. इसका मतलब है कि आपके मैसेज और मीडिया फाइलें सिर्फ फोन में ही नहीं बल्कि Telegram के सर्वरों पर भी सुरक्षित रहती हैं. यही कारण है कि आप किसी भी नए डिवाइस में लॉगिन करके पुराने चैट्स तक पहुंच सकते हैं.

WhatsApp मुख्य रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर आधारित है जबकि Telegram में नॉर्मल चैट्स क्लाउड पर स्टोर होती हैं. हालांकि Telegram Secret Chat नाम का एक स्पेशल फीचर भी देता है जिसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन उपलब्ध होता है और मैसेजेस को ज्यादा सुरक्षा मिलती है.

WhatsApp और Telegram में सबसे बड़ा अंतर

WhatsApp का फोकस निजी बातचीत पर ज्यादा है जबकि Telegram बड़े समुदायों और सार्वजनिक चैनलों के लिए जाना जाता है. Telegram पर एक चैनल के जरिए लाखों लोगों तक मैसेज पहुंचाया जा सकता है. इसके अलावा, बड़ी फाइलें शेयर करना और ऑटोमेटेड बॉट्स का इस्तेमाल भी Telegram की खासियत है.

यही सुविधाएं इसे पढ़ाई, बिजनेस और कंटेंट शेयरिंग के लिए खास बनाती हैं लेकिन कुछ मामलों में यही फीचर्स गलत इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ा देते हैं.

क्या Telegram पूरी तरह असुरक्षित है?

ऐसा बिल्कुल नहीं है. Telegram कई सेफ्टी फीचर्स प्रदान करता है जिनमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, पासकोड लॉक और सीक्रेट चैट जैसी सुविधाएं शामिल हैं. सुरक्षा काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करती है कि यूजर्स ऐप का इस्तेमाल कैसे कर रहा है और किस तरह के चैनलों या ग्रुप्स से जुड़ा हुआ है.

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