अल्बानिया में विरोध प्रदर्शन पर भिड़े शिवसेना नेता, राउत के बयान पर प्रियंका का पलटवार

अल्बानिया में विरोध प्रदर्शन पर भिड़े शिवसेना नेता, राउत के बयान पर प्रियंका का पलटवार


अल्बानिया में स्टूडेंट प्रोटेस्ट को लेकर शिवसेना नेता (UBT) के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है. जहां एक तरफ संजय राउत ने सुझाव दिया है कि भारत को इस अशांति से सबक लेना चाहिए. वहीं, उनकी पार्टी के सहयोगी प्रियंका चतुर्वेदी ने डेमोक्रेटिक संस्थाओं को निशाना बनाने वाले हिंसक प्रदर्शन से किसी भी तरह की तुलना को खारिज कर दिया है.

राउत ने अपने एक्स पोस्ट में कहा है कि अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में आग लगा दी, क्योंकि वह भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था. 

उन्होंने कहा है कि प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर हमला किया है. सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए. खासकर भारत को. 

प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- भारत को किसी से नहीं सीखना

वहीं, इस तरह की टिप्पणी को प्रियंका चतुर्वेदी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत को किसी अन्य देश से सीखने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कानून हाथ में लेने और संस्थाओं को अस्थिर करने को लेकर भी चेतावनी दी. 

उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से कहा है कि भारत को किसी दूसरे देश से सीखने की जरूरत नहीं है. अल्बानिया एक छोटा देश है, इसने सालों तक कम्युनिस्ट तानाशाही झेली है. 

उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और संसद जैसे संस्थानों में बाधा डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है. उन प्रदर्शनों के बाद एक इस्लामी आंदोलन ने अपने कब्जे में ले लिया. इसके कारण हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों पर हमले हुए हैं. 

चतुर्वेदी ने कहा है कि किसी भी लोकतंत्र में इस तरह के हिंसक सत्ता परिवर्तन की कोई जगह नहीं है. हमें मार्गदर्शन के लिए अल्बानिया, पेरिस या ऐसी अन्य घटनाओं के उदाहरणों की ओर नहीं देखना चाहिए.

अल्बानिया में क्या चल रहा है?

शिवसेना यूबीटी के नेताओं के बीच यह जुबानी जंग तब देखने को मिली है, जब अल्बानिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं. यहां प्रदर्शनकारी पीएम एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इस अशांति के दौरान सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया है. कई जगह पर आगजनी हुई है. इसमें सुप्रीम कोर्ट का एक हिस्सा भी शामिल है. छात्रों के नेतृत्व में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन सरकार में कथित भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा के खराब स्तर को लेकर लोगों के गुस्से का नतीजा है. पुलिस ने बताया है कि यहां 388 लोगों पर क्रिमिनल केस दर्ज किए गए. वहीं, कई पुलिस अधिकारी और प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. 



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