Explained: क्या है ईरान का ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’, हवा में ऑक्सीजन सोखकर मचाता है तबाही

Explained: क्या है ईरान का ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’, हवा में ऑक्सीजन सोखकर मचाता है तबाही


वैश्विक भू-राजनीति और सैन्य संतुलन के क्षेत्र में “फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स”  शब्द एक बार फिर गंभीर चिंता और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है. ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि तेहरान एक अत्यंत शक्तिशाली नया सैन्य हथियार प्रस्तुत करने की तैयारी में है, जिसे “फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स” नाम दिया जा रहा है.

यह बयान अमेरिका की ओर से आए उन संकेतों के प्रत्यक्ष जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें वाशिंगटन द्वारा ईरान के सुरक्षित और गहराई में बने भूमिगत सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए अपने सबसे भारी पारंपरिक हथियार GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) जिसे लोकप्रिय रूप से “मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स” कहा जाता है, के उपयोग की संभावना जताई गई थी.

यह नया सैन्य घटनाक्रम न केवल दो पारंपरिक सैन्य महाशक्तियों के बीच तनाव को बढ़ाता है, बल्कि यह दिवंगत ईरानी परमाणु भौतिक विज्ञानी मोहसेन फखरीज़ादेह की यादों को भी ताज़ा करता है. फखरीज़ादेह को ईरान के पूर्व परमाणु हथियार कार्यक्रम का मुख्य सूत्रधार माना जाता था. चाहे बात अत्यधिक विनाशकारी पारंपरिक महा-बमों की हो या फिर यूरेनियम संवर्धन के माध्यम से परमाणु क्षमता हासिल करने की, ईरान का यह आक्रामक रुख क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली के लिए अत्यंत गंभीर चुनौतियां उत्पन्न करता है.

ईरान के ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ और परमाणु क्षमता के खतरनाक होने के 10 मुख्य कारण

असममित युद्ध और रणनीतिक टकराव में वृद्धि

IRGC के अनुसार उनकी सैन्य रणनीति अब मुख्य रूप से ‘असममित युद्ध’ और सीधे आक्रामक हमलों पर केंद्रित हो रही है. अत्यधिक भारी और विनाशकारी क्षमता वाले हथियारों को सामने लाने का सीधा अर्थ यह है कि ईरान अपने क्षेत्रीय विरोधियों (विशेषकर इज़राइल) और पश्चिमी ताकतों (अमेरिका) के खिलाफ बिना किसी झिझक के रणनीतिक टकराव का दायरा बढ़ाने के लिए तैयार है. इससे पारंपरिक युद्ध के नियम बदल सकते हैं.

महत्वपूर्ण नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर बड़ा खतरा

अत्यधिक क्षमता वाले विस्फोटकों या महा-बमों के इस्तेमाल से मध्य पूर्व के नागरिक और आर्थिक जीवन से जुड़ी सुविधाओं को सीधा नुकसान पहुंच सकता है. इसमें वैश्विक तेल परिवहन मार्ग, ऊर्जा संयंत्र, शोधनागार और क्षेत्रीय परिवहन केंद्र शामिल हैं. इस प्रकार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था को पंगु बना सकता है.

परमाणु क्षमता हासिल करने की होड़

पारंपरिक सुपर-हथियारों को विकसित करने और उनके प्रदर्शन की यह होड़ ईरान को तेजी से परमाणु क्षमता हासिल करने के करीब ले जा सकती है. यदि पारंपरिक हथियारों के माध्यम से सैन्य संतुलन और ‘प्रतिरोध’ बनाने का प्रयास विफल होता है, तो ईरान के भीतर पूरी तरह से परमाणु हथियार विकसित करने की रणनीतिक इच्छाशक्ति और अधिक प्रबल हो जाएगी.

क्षेत्रीय स्तर पर हथियारों की अनियंत्रित होड़ 

ईरान की इस घोषणा से पड़ोसी देशों, विशेष रूप से खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और इज़राइल को अपनी सुरक्षा और रक्षा नीतियों का तत्काल पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा. इसके परिणामस्वरूप मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एडवांस बंकर-बस्टिंग हथियारों, और वायु रक्षा प्रौद्योगिकियों को प्राप्त करने के लिए पूरे मध्य पूर्व में एक अनियंत्रित और खतरनाक हथियारों की होड़ शुरू हो जाएगी.

गलत आकलन और पूर्व-निवारक हमलों का जोखिम

सार्वजनिक मंचों से अप्रमाणित या गुप्त महा-हथियारों की डींगें हांकना सैन्य रणनीति में “इस्तेमाल करो या खो दो” जैसी अनिश्चित स्थिति पैदा करता है. इस स्थिति में विरोधी देश जैसे कि अमेरिका या इज़राइल इन हथियारों के पूरी तरह से तैनात या सक्रिय होने से पहले ही, संभावित खतरे को टालने के लिए पूर्व सैन्य कार्रवाई करना जरूरी समझ सकते हैं, जिससे एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है.

गैर-राज्य प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से घातक हथियारों का प्रसार

ईरान पूरे मध्य पूर्व में एक व्यापक प्रॉक्सी नेटवर्क संचालित करता है, जिसमें यमन के हूथी विद्रोही, लेबनान का हिज़्बुल्लाह और इराक के विभिन्न मिलिशिया संगठन शामिल हैं. यदि उन्नत हथियारों की तकनीक, डिज़ाइन या अत्यधिक शक्तिशाली विस्फोटक सामग्री इन गैर-राज्य सशस्त्र समूहों तक पहुँचती है, तो अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और उप-राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा खतरे कई गुना बढ़ जाएँगे.

पर्यावरणीय तबाही और व्यापक असैन्य क्षति (C

अत्यधिक दबाव और उष्मा पैदा करने वाले महा-विस्फोटक हथियार विशाल क्षेत्र में तबाही मचाते हैं. इनके इस्तेमाल से उत्पन्न होने वाली शॉकवेव्स और अग्निकांड पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाते हैं. मध्य पूर्व के घनी आबादी वाले युद्ध क्षेत्रों या शहरी इलाकों के समीप ऐसे भारी हथियारों का प्रयोग अभूतपूर्व संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान ले सकता है.

अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा गलियारों पर संकट

होर्मुज़ जलडमरूमध्य और फ़ारस की खाड़ी जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों के निकट इस प्रकार के भारी हथियारों की मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए सीधा खतरा है. ध्यातव्य है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है. इस क्षेत्र में कोई भी सैन्य गतिविधि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को तुरंत बाधित कर सकती है.

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और परमाणु संधियों की विफलता

शक्तिशाली हथियारों का प्रदर्शन और आक्रामक बयानबाज़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के रास्तों को बंद कर देती है. इससे परमाणु अप्रसार संधि (NPT), हथियारों के नियंत्रण के उपायों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सत्यापन प्रयासों को गहरा धक्का पहुँचता है. जब शांतिपूर्ण वार्ता की गुंजाइश खत्म होती है, तब केवल सैन्य विकल्प ही शेष रह जाता है.

वैश्विक आर्थिक मंदी और ऊर्जा संकट का खतरा

मध्य पूर्व जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में महा-हथियारों से जुड़ा कोई भी बड़ा सैन्य संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी, माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, मुद्रास्फीति (महंगाई) चरम पर पहुंचेगी और दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में भारी अनिश्चितता छा जाएगी.

कितना खतरनाक है ये ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ 

‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ और ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ जैसे हथियार वास्तव में थर्मोबेरिक हथियार या वैक्यूम बम की श्रेणी में आते हैं. साधारण पारंपरिक बमों के विपरीत जिनमें बारूद और ऑक्सीजन का मिश्रण अंदर ही पैक होता है, यह बम विस्फोट के लिए आसपास के वातावरण (हवा) में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग करता है.

जब यह बम गिरता है, तो दो चरणों में विस्फोट होता है, पहले छोटे धमाके में एक अत्यधिक ज्वलनशील रसायन या ईंधन का बारीक बादल आसपास की हवा में फैल जाता है. इसके तुरंत बाद दूसरे धमाके में इस ईंधन के बादल में आग लगा दी जाती है. 

आग लगते ही यह विशाल गोला आसपास के वातावरण से लगभग पूरी ऑक्सीजन को सोख लेता है. इस प्रक्रिया से तीन अत्यधिक घातक परिणाम होते हैं. विस्फोट का तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जो सामने आने वाली हर चीज को भस्म कर देता है.

ऑक्सीजन के अचानक गायब होने और वायुमंडलीय दबाव में तीव्र गिरावट से एक शक्तिशाली ‘वैक्यूम’ (शून्य दबाव) पैदा होता है। जब हवा वापस उस खाली जगह को भरने के लिए तेजी से दौड़ती है, तो एक विशाल शॉकवेव पैदा होती है.

यह शॉकवेव और ऑक्सीजन की कमी भूमिगत बंकरों, गुफाओं या बंद इमारतों में छिपे लोगों के फेफड़ों को फाड़ देती है और उन्हें तुरंत घुटन से मार देती है. इसी कारण इसे हवा से ऑक्सीजन सोखकर अकल्पनीय तबाही मचाने वाला अत्यंत विनाशकारी गैर-परमाणु हथियार माना जाता है.



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