भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई. भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने नागरिकों की सुरक्षा करने में तो नाकाम रहा है, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कर रहा है. नई दिल्ली ने मांग की कि पाकिस्तान अपने अवैध कब्जे वाले सभी इलाकों को खाली करे.
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में अल्पसंख्यक मुद्दों को लेकर बातचीत के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान के रवैये पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधियों को सेना के इशारों पर चलने के बजाय अपने ही लोगों की भलाई पर ध्यान देना चाहिए.
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— ABP News (@ABPNews) October 25, 2026
‘अवैध कब्जे वाले इलाके खाली करे पाकिस्तान’
पुरी ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक पाकिस्तान ने इस मंच का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले इलाकों को खाली कर देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के लिए बेहतर होगा कि वे सेना के निर्देशों पर काम करने के बजाय अपने अंदर झांकें और अपने नागरिकों की चिंताओं को दूर करें.
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ बुरा बर्ताव
पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना मुख्य रूप से संबंधित देशों की अपनी जिम्मेदारी है, जो संप्रभु समानता के सिद्धांत पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत की विविधतापूर्ण सभ्यतागत परंपरा, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए उसके संवैधानिक सुरक्षा उपायों में झलकती है.
भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ बुरा बर्ताव कर रहा है, जबकि खुद भारत को धार्मिक स्वतंत्रता, अंतिम संस्कार के अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उपदेश देने की कोशिश कर रहा है.
जलवायु न्याय और न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर
इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के अपने दृष्टिकोण का बचाव किया और समानता, जलवायु न्याय और सतत विकास के महत्व पर जोर दिया. उप सचिव बरखा ताम्रकार ने ‘न्यायाधीशों और वकीलों की स्वतंत्रता’ पर काम करने वाले विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट पर भारत का पक्ष रखा. ताम्रकार ने जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताया, जिसके कारण विकास, आजीविका और मानवाधिकार प्रभावित हो सकते हैं.
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