मंदिर का प्रसाद शुद्ध है या नहीं? घी से रसोई तक ऐसे होती है जांच

मंदिर का प्रसाद शुद्ध है या नहीं? घी से रसोई तक ऐसे होती है जांच


Temple Prasad: मंदिर में मिला लड्डू अच्छी खुशबू दे रहा है. घी का स्वाद भी आ रहा है और पैकिंग साफ है. क्या इतना देखकर उसे शुद्ध माना जा सकता है? खाद्य सुरक्षा की जांच में जवाब इससे आगे तलाशा जाता है. घी कहां से आया, पानी कैसा इस्तेमाल हुआ, प्रसाद बनाने वाले के हाथ साफ थे या नहीं और तैयार होने के बाद उसे कैसे रखा गया, ये सभी बातें मायने रखती हैं.

प्रसाद की सुरक्षा परखने के दो अलग हिस्से हैं. पहला, सामग्री और तैयार प्रसाद की जांच. दूसरा, उसे बनाने, रखने और बांटने की व्यवस्था का निरीक्षण. रसोई साफ दिखने से घी की शुद्धता साबित नहीं होती. उसी तरह अच्छी सामग्री भी गलत रखरखाव से दूषित हो सकती है. FSSAI की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में खरीद से लेकर वितरण तक पूरी प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाता है. कैसे आइए जानते हैं-

जांच की शुरुआत लड्डू से पहले खरीद के रिकॉर्ड से

प्रसाद बनाने के लिए आया घी, दूध, खोया, बेसन या मेवा किस आपूर्तिकर्ता से खरीदा गया? पैकेट पर बैच नंबर और इस्तेमाल की अंतिम तारीख है या नहीं? सामग्री लेते समय खराब होने के संकेत देखे गए थे या नहीं?

निरीक्षण में इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और मौके की स्थिति से मिलाए जाते हैं. खरीद का रिकॉर्ड इसलिए अहम है कि किसी सामग्री में गड़बड़ी मिलने पर उसके स्रोत तक पहुंचा जा सके. भंडारण में यह भी देखा जाता है कि पहले खराब होने वाली सामग्री पहले इस्तेमाल हो रही है या पीछे पड़ी रह गई है.

घी की खुशबू से नहीं, जांच से खुलती है मिलावट

घी का रंग, दानेदार बनावट और खुशबू देखकर उसकी पूरी शुद्धता तय नहीं की जा सकती. संदेह होने पर नमूना लेकर प्रयोगशाला में निर्धारित विधियों से जांच की जाती है. जांच का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह की मिलावट या मानक से विचलन की आशंका है.

मसलन घी में वनस्पति वसा की मिलावट का पता प्रयोगशाला परीक्षण से लगाया जा सकता है. FSSAI की एक आधिकारिक कार्रवाई में अधिसूचित प्रयोगशाला की रिपोर्ट से ऐसी मिलावट की पुष्टि हुई थी. इसलिए मौके पर लिया गया नमूना और उसकी रिपोर्ट, केवल देखकर निकाले गए निष्कर्ष से अलग महत्व रखते हैं.

यही वजह है कि नमूना जांच के लिए भेजा जाना, मिलावट साबित हो जाना नहीं है. निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए.

पानी साफ दिखे, फिर भी सवाल बाकी रहते हैं

प्रसाद में इस्तेमाल होने वाला पानी भी जांच का अहम हिस्सा है. हलवे या खीर में पड़ने वाला पानी ही नहीं, भोजन के संपर्क में आने वाली सतहों और बर्तनों की सफाई में इस्तेमाल पानी की गुणवत्ता भी मायने रखती है.

FSSAI की BHOG मार्गदर्शिका में प्रसाद बनाने के लिए पीने योग्य पानी इस्तेमाल करने, पानी की टंकियां समय-समय पर साफ करने और उनका रिकॉर्ड रखने पर जोर है. पानी की गुणवत्ता की नियमित प्रयोगशाला जांच का भी उल्लेख है. इसलिए केवल आरओ लगा होना पूरी व्यवस्था सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता. रखरखाव और भंडारण भी देखने पड़ते हैं.

रसोई में फर्श से लेकर कर्मचारियों के हाथ तक नजर

निरीक्षण के दौरान अधिकारी देखते हैं कि फर्श और काम करने की जगह आसानी से साफ हो सकती है या नहीं. दरवाजों और खिड़कियों से कीड़े आने से रोकने के इंतजाम हैं या नहीं. बर्तन ऐसे पदार्थ के बने हैं या नहीं जिन्हें ठीक से साफ किया जा सके. खाना बनाने, ठंडा करने और सुरक्षित तापमान पर रखने की सुविधाएं भी जांच का हिस्सा हैं.

प्रसाद तैयार करने और बांटने वाले लोगों की व्यक्तिगत सफाई भी उतनी ही जरूरी है. साफ हाथ, कटे हुए नाखून और काम शुरू करने से पहले तथा शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोना बुनियादी अपेक्षाएं हैं. केवल साफ कपड़े देखकर भोजन संभालने की पूरी प्रक्रिया का आकलन नहीं किया जा सकता.

कूड़ेदान ढका है या नहीं, कचरा नियमित हटता है या रसोई में जमा रहता है, सफाई के रसायन खाद्य सामग्री से अलग रखे गए हैं या नहीं, इन छोटी दिखने वाली बातों का भी प्रसाद की सुरक्षा से सीधा संबंध है.

बनने के बाद प्रसाद कहां और कैसे रखा गया?

खीर, दूध या खोये से बने प्रसाद और सूखे लड्डू की रखरखाव जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं. इसलिए तैयार प्रसाद को उसकी प्रकृति के अनुसार उचित तापमान और स्वच्छ वातावरण में रखना जरूरी है. निरीक्षण में भंडारण, तापमान की निगरानी और दूषित होने से बचाव की व्यवस्था देखी जाती है. कच्ची सामग्री, अधबना भोजन और तैयार प्रसाद, तीनों का रखरखाव इस पड़ताल में आता है.

इससे एक जरूरी बात साफ होती है: जांच केवल उस समय तक सीमित नहीं रह सकती, जब प्रसाद कड़ाही से उतरा. श्रद्धालु तक पहुंचने के दौरान उसकी सुरक्षा भी व्यवस्था का हिस्सा है.

BHOG प्रमाणन का क्या मतलब है?

FSSAI की BHOG यानी Blissful Hygienic Offering to God पहल धार्मिक स्थलों पर प्रसाद और भोजन तैयार करने तथा संभालने में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देती है. इसमें ऑडिट, भोजन संभालने वाले लोगों का बुनियादी प्रशिक्षण और खाद्य सुरक्षा के संदेश प्रदर्शित करने जैसे कदम शामिल हैं. निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर धार्मिक स्थल को मान्यता या प्रमाणन मिलता है.

यहां फर्क समझना जरूरी है. रसोई की व्यवस्था का ऑडिट और किसी खास बैच के प्रसाद की लैब रिपोर्ट अलग बातें हैं. इसलिए किसी प्रमाणपत्र या अच्छे ऑडिट स्कोर को पढ़ते समय देखना चाहिए कि मूल्यांकन किस चीज का हुआ है. उसे हर लड्डू की अलग प्रयोगशाला जांच समझ लेना गलत होगा.

प्रसाद के प्रति भरोसे को मजबूत करने के लिए साफ रसोई के साथ साफ रिकॉर्ड भी चाहिए. सामग्री का स्रोत पता हो, पानी की गुणवत्ता जांची जाए, कर्मचारी प्रशिक्षित हों और जरूरत पड़ने पर नमूने की जांच हो. श्रद्धालु के हाथ तक सुरक्षित प्रसाद पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं रोजमर्रा के इंतजामों से पूरी होती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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