ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने जीता राष्ट्रपति चुनाव, चौथी बार संभालेंगे सत्ता

ब्राजील में लूला दा सिल्वा ने जीता राष्ट्रपति चुनाव, चौथी बार संभालेंगे सत्ता


ब्राजील में राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कड़े मुकाबले में कंजर्वेटिव उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर एक बार फिर सत्ता हासिल कर ली है. 80 वर्षीय लूला को 51.75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि पूर्व राष्ट्रपति और जेल में बंद जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो को 48.25 प्रतिशत मत हासिल हुए. 

ब्राजील के निर्वाचन प्राधिकरण ने नतीजों की पुष्टि की. यह जीत इसलिए ऐतिहासिक है, क्योंकि 1985 में सैन्य तानाशाही खत्म होने के बाद पहली बार कोई उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में पीछे रहने के बावजूद दूसरे दौर में जीत दर्ज करने में सफल रहा है. इस नतीजे से लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वामपंथी नेतृत्व बरकरार रहेगा.

पहले दौर में पीछे थे लूला, ऐसे पलटी बाजी

4 अक्टूबर को पहले दौर की मतगणना में लूला, फ्लावियो से करीब 22 लाख वोट पीछे थे. इसके बाद उन्होंने अपने चुनाव अभियान में बदलाव किया और युवाओं समेत उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की, जो अब तक फैसला नहीं कर पाए थे. उन्होंने लगातार रैलियां कीं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग जुटे.

लूला के अभियान में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के कार्यकाल को प्रमुखता से उठाया गया. रैलियों में ‘नेवर अगेन बोल्सोनारो’ यानी ‘बोल्सोनारो दोबारा कभी नहीं’ का नारा दिया गया. इसमें कोरोना महामारी से निपटने के तरीके, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में कटौती और अमेजन के जंगलों को हुए नुकसान जैसे मुद्दे उठाए गए.

युवाओं से जुड़ने के लिए लूला ने स्मार्टफोन खरीदा और समर्थकों के साथ सेल्फी व वीडियो बनाए. ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किए गए. उनके समर्थकों ने घर-घर जाकर भी लोगों को अपने पक्ष में मतदान के लिए मनाने की कोशिश की.

महंगाई, अपराध और कल्याणकारी योजनाएं बने चुनावी मुद्दे

लूला को महंगाई और अपराध को लेकर मतदाताओं की चिंता के बीच कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा. फ्लावियो ने अपराध पर सख्त कार्रवाई और खाद्य पदार्थों की कीमतें घटाने का वादा किया. वहीं, लूला ने अनिर्णीत मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए आर्थिक प्रोत्साहनों की पेशकश की.

दोनों खेमों के सहयोगियों और परिवार के सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे. जायर बोल्सोनारो का नाम बड़े विवादों में आया, जबकि लूला भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि के बाद एक साल से अधिक समय जेल में रहे थे. बाद में उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी गई थी.

लूला के समर्थकों ने गरीबी कम करने और वंचित समुदायों के हित में उनके काम को समर्थन का आधार बताया. दूसरी ओर, फ्लावियो के समर्थकों ने महंगाई और अधिक करों को लेकर असंतोष जताया.

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियां भी चर्चा में रहीं

चुनाव में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियां भी अहम मुद्दा रहीं. लूला ने ब्राजील के निर्यात पर लगाए गए अमेरिकी शुल्क और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की.

फ्लावियो ने ट्रंप प्रशासन से बेहतर संबंध बनाने और व्यापारिक समझौते करने का वादा किया. उन्होंने दुर्लभ मृदा खनिजों के क्षेत्र में सहयोग की जरूरत भी बताई. ब्राजील के अनुमान के मुताबिक, देश में ऐसे खनिजों का भंडार 2.1 करोड़ टन तक हो सकता है, जो चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा भंडार है. फ्लावियो ने अमेरिकी सरकार से मदद मिलने से इनकार किया. ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह चुनाव पर नजर रख रहे हैं, लेकिन किसी उम्मीदवार का समर्थन करने से परहेज किया.

मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने पर विवाद

रविवार को मतदान समाप्त होने के समय सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्रिस्टियानो ज़ानिन ने मतदान की अवधि दो घंटे बढ़ाकर स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे तक कर दी. लूला के खेमे ने नौ राज्यों में मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने वाली बसों से जुड़ी समस्याओं का हवाला दिया था, जबकि बोल्सोनारो के खेमे ने दक्षिणी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में समय बढ़ाने की मांग की थी.

हालांकि, देशभर में समय बढ़ाने के फैसले से विवाद खड़ा हो गया. कुछ मतदान केंद्र बंद हो चुके थे. रियो डी जेनेरियो के एक केंद्र पर मतदान मशीनें बंद होने के बाद दोबारा शुरू नहीं हो सकीं. बोल्सोनारो समर्थक सांसद निकोलस फरेरा ने एक्स पर लिखा, “या तो हम जीतेंगे, या हम जीतेंगे. इसे चेतावनी समझें.”

जीत के बाद सड़कों पर उतरे लूला के समर्थक

नतीजों में लूला की बढ़त सामने आने के बाद रियो डी जेनेरियो और साओ पाउलो में समर्थकों ने जश्न मनाया. कई जगहों पर लोग बार और अन्य स्थानों पर जुटकर मतगणना देख रहे थे. समर्थकों ने इसे गरीबों और वंचित समुदायों की जीत बताया, जबकि बोल्सोनारो समर्थकों ने बदलाव की जरूरत पर जोर दिया.

लूला ने इससे पहले 2003 से 2010 तक ब्राजील का नेतृत्व किया था. उन्होंने 1989 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था, लेकिन पहली जीत 2002 में मिली. इसके बाद 2006 में भी वह जीते. 2022 में उन्होंने जायर बोल्सोनारो को हराकर वापसी की थी.

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