India-UAE Direct Pipeline News: ईरान वॉर के बीच भारत ने दुनिया के सबसे बिज़ी समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बायपास करने का मास्टप्लान तैयार कर लिया है. भारत एक ऐसी महात्वाकांक्षी योजना पर विचार कर रहा है, जो सीधे खाड़ी देशों से भारत तक तेल और गैस पहुंचाएगी. भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक डायरेक्ट अंडर-सी पाइपलाइन यानी समंदर के नीचे से गुजरने वाली पाइपलाइन की सुगबुगाहट तेज हो गई है.
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव इस समय भारत सरकार के उच्चतम स्तर पर विचाराधीन है. पीएमओ इस प्रोजेक्ट के रणनीतिक फायदों का आकलन कर रहा है.
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, “यह केवल तत्काल संकट के प्रबंधन के बारे में नहीं है, बल्कि अगले दो-तीन दशकों के लिए भारत की ऊर्जा आपूर्ति सीरीज में रणनीतिक लचीलापन बनाने के बारे में है.” यह पाइपलाइन न केवल कच्चे तेल बल्कि एलएनजी और एलपीजी की सीधी सप्लाई भी सुनिश्चित करेगी.
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इस पाइपलाइन के क्या फायदे होंगे?
- समुद्री टैंकरों पर होने वाले हमलों और समुद्री डकैती का खतरा खत्म हो जाएगा.
- लागत में कमी आएगी, क्योंकि समुद्री रास्तों में अक्सर तनाव के दौरान शिपिंग फ्रेट रेट्स और इंश्योरेंस प्रीमियम यानी बीमा की लागत बहुत बढ़ जाती है. डायरेक्ट पाइपलाइन होने से भारत इन अस्थिर कीमतों से बच सकेगा.
- यह भारत को भविष्य के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय ऊर्जा पार्टनर के रूप में UAE के साथ और भी मजबूती से जोड़ेगा.
हालांकि, यह प्रोजेक्ट आसान नहीं रहने वाला है. विशेषज्ञों का मानना है कि समंदर के गहरे पानी में इतनी लंबी पाइपलाइन बिछाना एक इंजीनियरिंग चुनौती है. इसमें भारी निवेश की जरूरत होगी और इसे पूरा होने में कम से कम 5 से 7 साल का समय लग सकता है. लेकिन रणनीतिक लिहाज से भारत अब जोखिम नहीं लेना चाहता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी UAE यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है.
इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
दरअसल भारत अपनी जरूरत का करीब आधा कच्चा तेल और लगभग 90 फीसदी एलपीजी इसी रास्ते से मंगाता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक ऐसा चोकपॉइंट है, जहां जरा सा भी तनाव होने पर भारत की पूरी एनर्जी सप्लाई चेन ठप हो सकती है और ऐसा फिलहाल देखने को भी मिल रहा है.
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हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं. अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो न केवल तेल की कीमतें आसमान छुएंगी, बल्कि भारत में ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है.






