H-1B वीजा बंद करने की फिराक में अमेरिका? लेबर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

H-1B वीजा बंद करने की फिराक में अमेरिका? लेबर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा


अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है, जिसने भारतीय पेशेवरों और IT कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि अगले 365 दिनों में H-1B वीजा प्रोग्राम ‘बहुत अलग’ दिखेगा और इस बात के संकेत दिए कि इस प्रोग्राम को पूरी तरह बंद भी किया जा सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई H-1B वीजा बंद हो जाएगा और भारतीयों पर कितना असर पड़ेगा?

लेबर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट में क्या है?

अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट और इंस्पेक्टर जनरल के बयान के मुताबिक, H-1B वीजा प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच चल रही है. डी’एस्पोसिटो ने खुलासा किया कि उनके विभाग ने दर्जनों सबपोनास जारी किए हैं और कई जगहों पर सर्च वारंट भी निकाले हैं. उन्होंने ‘फर्जी नियोक्ताओं’, ‘फर्जी नौकरियों’ और ‘वीजा मिल्स’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि ‘असली मामला’ है.

डी’एस्पोसिटो ने साफ कहा, ‘हमारे पास हथकड़ी तैयार है… हम केस बना रहे हैं.’ उनके मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का पूरा फोकस यही दिखाता है कि विदेशी श्रमिक वीजा प्रोग्राम को लेकर बड़ा बदलाव आने वाला है.

क्या H-1B वीजा पूरी तरह बंद हो जाएगा?

फिलहाल इसका सीधा जवाब है- नहीं. अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि H-1B वीजा पूरी तरह बंद हो जाएगा. डी’एस्पोसिटो ने भी स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि प्रोग्राम खत्म किया जाएगा. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि आने वाले समय में यह प्रोग्राम बहुत बदला हुआ नजर आएगा.

हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस में कुछ विधेयक जरूर पेश किए गए हैं, जो H-1B को खत्म करने की बात करते हैं. जनवरी 2026 में ‘End H-1B Now Act’ नाम का एक बिल पेश किया गया, जिसमें 2026 से 2035 तक हर साल H-1B वीजा की संख्या घटाकर शून्य करने का प्रस्ताव है. लेकिन यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, कानून नहीं बना है.

अप्रैल 2026 में ‘End H-1B Visa Abuse Act’ भी पेश हुआ, जिसमें तीन साल के लिए H-1B जारी करने पर रोक और न्यूनतम सैलरी 2 लाख डॉलर करने की बात कही गई है. ये दोनों बिल अभी कमेटी के पास हैं और इनका पास होना आसान नहीं है.

अब तक क्या-क्या बदलाव हो चुके हैं?

ट्रंप प्रशासन ने H-1B को लेकर 4 बड़े कदम उठाए हैं, जिनका सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ रहा है:

  • 1 लाख डॉलर का फीस: सितंबर 2025 से उन H-1B आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाया गया, जो अमेरिका के बाहर से आने वाले श्रमिकों के लिए हैं. यह फीस सितंबर 2027 तक बढ़ा दी गई है. हालांकि, अदालतों ने इसे चुनौती दी है और दो संघीय जजों ने इसे अवैध ठहराया है, लेकिन सरकार इसके खिलाफ अपील कर रही है.
  • 60 दिन की ग्रेस पीरियड खत्म: DHS ने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत H-1B कर्मचारी को नौकरी छूटने पर 60 दिन का जो समय मिलता है, उसे खत्म किया जा सकता है. यानी नौकरी गई तो तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ेगा.
  • लेऑफ पर सख्ती: सितंबर 2026 के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के मुताबिक, अगर कोई कंपनी अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर H-1B वर्कर रखती है, तो उसकी जांच होगी. यह नियम हर उस कंपनी पर लागू होगा, जिसने पिछले एक साल में अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है.
  • प्रोजेक्ट फायरवॉल: सितंबर 2025 में लेबर डिपार्टमेंट ने इस पहल की शुरुआत की, जिसके तहत H-1B नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है. अब तक 175 से ज्यादा जांचें शुरू की जा चुकी हैं.

इसका असर कितना दिख रहा है?

H-1B वीजा की मांग तेजी से घटी है. FY 2024 में जहां 7.8 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए थे, वहीं FY 2026 में यह संख्या घटकर 3.58 लाख रह गई. बड़ी IT कंपनियों की H-1B रजिस्ट्रेशन में 92% तक की गिरावट दर्ज हुई है. FY 2026 में अब तक सिर्फ 52,360 H-1B वीजा अप्रूव हुए हैं, जबकि 2025 में यह संख्या 1,13,485 थी.

आगे क्या होगा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि H-1B प्रोग्राम पूरी तरह बंद होने की संभावना कम है, क्योंकि अमेरिकी टेक कंपनियों को हाई-स्किल विदेशी श्रमिकों की जरूरत है. लेकिन यह तय है कि आने वाले समय में प्रोग्राम को और सख्त बनाया जाएगा. सिर्फ सबसे जरूरी और हाई-पेड नौकरियों के लिए ही वीजा मिलेगा और नियोक्ताओं को कड़ी जांच से गुजरना पड़ेगा.

भारतीय पेशेवरों और IT कंपनियों के लिए यह साफ संदेश है कि अब अमेरिका में H-1B पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. कंपनियां पहले ही लोकल हायरिंग और दूसरे देशों में रिटर्न टू वर्क मॉडल पर शिफ्ट हो रही हैं. जिन लोगों का H-1B है, उन्हें भी अपनी स्थिति मजबूत रखने की सलाह दी जा रही है.



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