फ्रांस आंदोलन में कौन थे हिंसा करने वाले नकाबपोश? जिन्होंने जला दिया इतिहास

फ्रांस आंदोलन में कौन थे हिंसा करने वाले नकाबपोश? जिन्होंने जला दिया इतिहास


फ्रांस में हाल के बड़े प्रदर्शन मुख्य रूप से स्कूलों की खराब स्थिति और महंगाई, जीवन जीने का लागत से शुरू हुए थे और 17 अक्टूबर को वे हिंसक हो गए. करीब 5 लाख से ज्यादा लोग देश के कई शहरों में शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हुए लेकिन शाम होते होते काले कपड़ो में हूडी पहने चेहरा छुपाए कुछ हिंसक समूहों ने इसे लूटपाट, आगजनी और पुलिस से झड़पों में बदल दिया.

हिंसक लोगो ने सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया, लिमोज का ऐतिहासिक सिटी हॉल लगभग जलकर नष्ट हो गया, मार्सिले का सिटी हॉल तोड़कर अराजक ग्राफिटी की गई, लियोन का टूरिस्ट ऑफिस जला दिया गया. दुकानें लूटीं लग्जरी बुटीक, सुपरमार्केट, Apple स्टोर सब शामिल हैं इसमें, जिन शहरो में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ उसमें रिस, मार्सिले, बोर्डो, लिल शामिल हैं.

किसने लगाई आग

शनिवार को बढ़ती महंगाई के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान जिसमें लिमोज (Limoges) शहर में 5,500 लोग जुटे थे. एक समूह जो काले कपड़ो में हूडी पहने ने सिटी हॉल के पूर्वी हिस्से पर हमला कर दिया और वहां आग लगा दी. तीन घंटे के भीतर, 1883 में बनी और पेरिस के ‘होटल डी विले’ (Hôtel de Ville) की तर्ज पर डिजाइन की गई इस ऐतिहासिक इमारत की छत पूरी तरह से आग की लपटों में घिर गई. इस भीषण आग ने लोगों को स्तब्ध और अविश्वास की स्थिति में डाल दिया.

दुखी हैं फ्रांस के लोग

ली मॉंडे की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार सुबह सैकड़ों लोग इस तबाही को अपनी आंखों से देखने के लिए इमारत के आंशिक रूप से जले हुए हिस्से के सामने जमा हो गए. 26 वर्षीय यासीन ने कहा, “मुझे बहुत घिन आ रही है.” वहीं, साहित्य की छात्रा 18 वर्षीय मरीन की आंखों में आँसू थे और उसने कहा कि वह “बहुत दुखी” है. “मुझे समझ नहीं आ रहा कि हालात यहां तक कैसे पहुंच गए.” रविवार शाम को, शहर के ‘प्लेस डे ला रिपब्लिक’ (Place de la République) में हिंसा की निंदा करने के लिए एक रैली निकाली गई, जिसमें नगर प्रशासन के अनुसार 7,000 लोग शामिल हुए

अपने इतिहास को लेकर संवेदनशील हैं

फ्रांसीसी लोग अपने इतिहास और विरासत को लेकर काफी सजग और संवेदनशील रहे है. फ्रांस में एतिहासिक इमारतों के सजोने की व्यवस्था बहुत पुरानी और मजबूत है. इसकी जड़ें 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के समय से जुड़ी हैं, जब क्रांति के दौरान हुई तोड़फोड़ के बाद लोगों में विरासत बचाने की चेतना पैदा हुई. आज फ्रांस में लगभग 45,000 से ज्यादा इमारतें और लाखों वस्तुएं संरक्षित हैं. 1913 का कानून और बाद के नियम इमारतों को नष्ट या बदलने से बचाते हैं.

फ्रांस के लोग समझते हैं कि हिंसा होने पर चर्चा असली मुद्दे से हटकर आगजनी और अपराध की ओर चली जाती है. इससे आंदोलन के हित कमजोर पड़ते हैं. हिंसक समूह अहिंसक आंदोलनों को नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि वे लोगों की भागीदारी घटा देते हैं.

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