कार्तिक मास 2026: 27 अक्टूबर से शुरुआत; दीपदान, तुलसी-आंवला पूजन और खान-पान के इन 7 नियमों से म

कार्तिक मास 2026: 27 अक्टूबर से शुरुआत; दीपदान, तुलसी-आंवला पूजन और खान-पान के इन 7 नियमों से म


Kartik Maas 2026: हिन्दी पंचांग का सबसे पावन और आठवां महीना यानी कार्तिक मास इस साल 27 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जो 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा. पुराणों में इस महीने को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है. बड़े तीज-त्योहारों से भरा यह महीना सेहत और आध्यात्मिक साधना, दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर – जोधपुर) के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, कार्तिक मास में श्रीगणेश, भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि, गोवर्धन पर्वत, सूर्य देव, छठ माता के साथ-साथ भगवान कार्तिकेय की पूजा का विशेष विधान है.

कार्तिक महीने का नाम शिव-पार्वती के पुत्र स्वामी कार्तिकेय के नाम पर पड़ा है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान नारायण ने ब्रह्मा जी को, ब्रह्मा जी ने देवर्षि नारद को और नारद जी ने महाराज पृथु को कार्तिक मास के महात्म्य और इसके 7 प्रमुख नियमों के बारे में बताया था.

1. दीपदान से मिलता है कभी न खत्म होने वाला पुण्य

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि कार्तिक मास का सबसे प्रमुख अनुष्ठान दीपदान है.

  • इस माह में मंदिर, तुलसी, आंवले का वृक्ष, नदी, पोखर, कुएं, बावड़ी और तालाब के किनारे दीपदान किया जाता है.
  • जो व्यक्ति देवालय, नदी किनारे, मार्ग पर या शयन स्थल के पास दीपदान करता है, उसे सर्वतोमुखी लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.
  • मंदिर में दीप जलाने वाले को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है, वहीं दुर्गम स्थानों पर दीपदान करने वाले को नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है.
  • रात्रि में घर की छत पर आकाश दीप जलाने का भी विशेष फल है.

2. ऋतु परिवर्तन और सेहत: खान-पान में जरूर बरतें ये सावधानियां

कार्तिक मास से शरद ऋतु का आरंभ होता है. दो मौसमों के संधिकाल के कारण इस दौरान शारीरिक व्याधियां और वात-पित्त की समस्या बढ़ जाती है. ग्रंथों में इस महीने की दिनचर्या में विशेष बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं:

क्या खाएं: बदलते मौसम में ठंड से बचाव के लिए गर्म केसर वाला दूध और मौसमी फल लें. जमीकंद जैसे मूली, गाजर, गराडू और शकरकंद का सेवन स्वास्थ्यवर्धक माना गया है.

क्या न खाएं: इन दिनों पित्त का प्रकोप रहता है, इसलिए बैंगन, छाछ (मट्ठा), करेला, फलियां और सभी प्रकार की दालों के सेवन से बचना चाहिए.

तुलसी प्रयोग: सूर्योदय से पूर्व उठकर खाली पेट जल के साथ तुलसी के पत्तों को निगलने से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है.

दिनचर्या के नियम: जमीन पर सोने से आलस्य और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं. इस माह में तेल मालिश की मनाही बताई गई है. शरीर को ढककर रखने वाले वस्त्र पहनें ताकि मौसमी सर्दी-जुकाम से बचा जा सके.

3. शरद पूर्णिमा पर अश्विनी कुमार और धनतेरस पर प्रकट हुए थे धन्वंतरि

कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) पर देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमारों और अमृतमयी चंद्रमा का पूजन होता है, जिससे कार्तिक मास में आरोग्य बना रहे. इसके ठीक 12 दिन बाद धनतेरस पर औषधियों के जनक और देवों के चिकित्सक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे. इनकी आराधना से लंबी आयु और आरोग्य का वरदान मिलता है.

4. ब्रह्मचर्य, वाणी संयम और ध्यान का महीना

कार्तिक मास में चित्त की एकाग्रता सहज होती है. इसलिए जिन लोगों का मन अशांत रहता है, उन्हें इस माह में विशेष रूप से जप और ध्यान करना चाहिए:

  • कम बोलें, विवादों से दूर रहें और किसी की निंदा न करें.
  • ब्रह्मचर्य का पालन करने से आत्मबल और इच्छा शक्ति सुदृढ़ होती है.
  • शांत वातावरण में अपने इष्टदेव के मंत्रों का नियमित जाप करें.

5. पवित्र नदी स्नान और सूर्य अर्घ्य की परंपरा

शरद पूर्णिमा से प्रारंभ होकर पूरे कार्तिक माह में ब्रह्ममुहूर्त के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है.

  • यह स्नान विवाहित और अविवाहित महिलाओं समेत सभी के लिए समान रूप से कल्याणकारी माना गया है.
  • यदि तीर्थ या नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से तीर्थ स्नान समान पुण्य प्राप्त होता है.
  • स्नान के पश्चात तांबे के पात्र से भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और घाट या घर पर जरूरतमंदों की सहायता करें.

6. शालग्राम, तुलसी-आंवला पूजन और महादान

कार्तिक मास में भगवान विष्णु के शालग्राम स्वरूप की पूजा महापुण्यदायी मानी गई है. इसके साथ ही तुलसी और आंवले के पूजन से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

  • दान का महत्व: मौसम में ठंडक बढ़ने के कारण जरूरतमंदों को कंबल, गर्म कपड़े, अनाज और धन का दान करें.
  • इस माह में केले का फल, कंबल, गाय, तुलसी का पौधा और आंवले का पौधा दान करना सर्वोत्तम माना गया है. गौशाला में गोवंश की सेवा और आर्थिक सहयोग भी विशेष फलदायी है.

7. पौराणिक प्रसंग: इसी माह में हुआ था तारकासुर का वध

दैत्यराज तारकासुर ने कठोर तप कर महादेव से वरदान मांगा था कि उसका वध केवल शिवपुत्र के हाथों ही संभव हो. वरदान के प्रभाव से जब उसने तीनों लोकों में अत्याचार बढ़ा दिया, तब देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ.

उत्पन्न हुए भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को देवताओं का सेनापति बनाया गया और उन्होंने तारकासुर का वध कर धर्म की रक्षा की. कृतिकाओं द्वारा पालन-पोषण किए जाने के कारण उनका नाम कार्तिकेय पड़ा और उन्हीं के नाम पर इस पावन महीने का नाम ‘कार्तिक’ विख्यात हुआ.

कार्तिक मास के प्रमुख व्रत एवं त्योहार (तिथि सूची)

दिनांक पर्व / व्रत
1 नवंबर अहोई अष्टमी
5 नवंबर रमा एकादशी
6 नवंबर धनतेरस (धन्वंतरि जयंती)
7 नवंबर नरक चतुर्दशी (रूप चौदस)
8 नवंबर दीपावली, महालक्ष्मी पूजन
10 नवंबर गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
11 नवंबर भाई दूज (यम द्वितीया)
13 से 16 नवंबर महापर्व छठ पूजा
17 नवंबर गोपाष्टमी
18 नवंबर अक्षय नवमी (आंवला नवमी)
20 नवंबर देवउठनी ग्यारस (प्रबोधिनी एकादशी)
21 नवंबर तुलसी विवाह
23 नवंबर बैकुंठ चतुर्दशी
24 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा (समापन)

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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