8 महीने गड्ढे में रहा यूक्रेनी सैनिक, जिंदा रहने के लिए काटा पैर, पढ़ें पूरी कहानी

8 महीने गड्ढे में रहा यूक्रेनी सैनिक, जिंदा रहने के लिए काटा पैर, पढ़ें पूरी कहानी


यूक्रेन के एक सैनिक के जिंदा बचने की दिलचस्प कहानी सामने आई है. लगभग 8 महीनों तक 49 वर्षीय यूक्रेनी सैनिक कोस्तियांतिन व्लासेंको एक खाली स्कूल के बॉयलर के नीचे एक गड्ढे में अकेला जिंदा रहे जबकि उनका साथी मारा जा चुका था. रूसी ड्रोन हमले में उनका बायां पैर उड़ गया था और दूसरे पैर को उन्होंने खुद ही एक ईंट पर रखकर चाकू से काट दिया था. 

यूक्रेनी मीडिया आउटलेट Censor.net को उन्होंने बताया कि उनका बचना नामुमकिन लग रहा था. मिशन की योजना बनाने वाले अधिकारी के अनुसार वहां तक ​​ट्रक या बख्तरबंद गाड़ियां नहीं पहुंच सकती थीं और उन्हें बचाने के लिए भेजे गए 2 रोबोट भी नष्ट हो गए थे. अक्टूबर की शुरुआत में ड्रोन के जरिए उनके पास खाने-पीने की चीजें भेजी गईं. इसके अलावा एक फोन भी दिया गया. 

4 अक्टूबर को 6 प्रोपेलर वाला एक बहुत बड़ा ड्रोन उनके पास आया. इसके बाद व्लासेंको ने खुद को उसके विंच के हुक से जोड़ा और रिमोट से कंट्रोल होने वाली यह मशीन उसे फ्रंट लाइन के ऊपर से लगभग 15 किमी दूर सुरक्षित जगह पर ले गई. कोस्तियांतिन व्लासेंको, क्रिवी रिह के रहने वाले हैं और 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड में तैनात हैं. 

पिछले साल हुई थी तैनाती
पिछले साल उन्हें वर्टुन नाम की एक फ्रंट-लाइन पोस्ट पर भेजा गया, जहां उन्हें ‘बास्की’ नाम के एक साथी के साथ रहना था. उनके अनुसार वह पोस्ट कंक्रीट के एक ड्रेनेज पाइप जैसी थी, जिसके बगल में खुदाई करके एक शेल्टर बनाया गया था. एक दिन वहां पूरा आसमान रूसी ड्रोनों से भर गया. उनके मुताबिक, पोस्ट पर 2 और सैनिक भेजे गए थे, लेकिन रास्ते में ही वे मारे गए. उनके शवों को वापस लाने के लिए भेजे गए 2 और सैनिक भी मारे गए. इसलिए उन्होंने अपने कमांड से कहा कि अब किसी और को न भेजा जाए. उन्होंने कहा, “मैं अकेले मरना पसंद करूंगा, बजाय इसके कि मेरी वजह से और लोग भी मारे जाएं.”

बर्थडे के दिन गई दोस्त की जान
फरवरी में वो दोनों एक वीरान पड़े चुके स्कूल में चले गए. जब खाने का पार्सल लेने के लिए बाहर निकले, तो रूसी निगरानी ड्रोन ने उन्हें देख लिया और दूसरे ड्रोन ने उन पर हमला कर दिया. 16 फरवरी को बास्की का 50वां जन्मदिन था और उसी दिन उनकी मौत हो गई जबकि व्लासेंको के बाएं पैर में चोट लग गई थी, जो महीनों बाद सड़ गया और गिरने की वजह से उनका दाहिना पैर भी बुरी तरह घायल हो गया. उन्होंने बताया कि मैं मुश्किल से बस हिल-डुल पा रहा था. 

पत्नी की किताब से मिला हौंसला
Oboronka नाम के न्यूज आउटलेट के मुताबिक ड्रोन हर 4-5 दिन में उनके लिए खाना, दवाइयां, सिगरेट और मिठाइयां लाते थे और वह रेडियो के जरिए संपर्क में बने रहे. उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह खुशी की बात थी कि मैं अकेला नहीं था और मैं किसी की आवाज सुन सकता था. उनकी पत्नी ने स्टीफन किंग की एक किताब भेजी, जिसे उन्होंने पढ़ा. 

व्लासेंको ने यूक्रेनी न्यूज आउटलेट को बताया कि हड्डी मास को चीरकर बाहर आने लगी थी और पार्सल लेने के लिए जितना वह रेंगते थे, हालत उतनी ही खराब होती जाती थी ऐसे में उन्होंने तय कर लिया कि अब इस पैर को काटना ही होगा. इसके बाद उन्होंने ईंट पर अपना पैर रखकर उसे चाकू से काट दिया. 

यूक्रेनी ड्रोन ने किया रेस्क्यू
इस रेस्क्यू मिशन में 6 महीने लगे. अधिकारियों को गुर्ज़ुफ डिफेंस नाम की एक यूक्रेनी कंपनी के बनाए एक बड़े ड्रोन के बारे में पता चला. इसमें 6 रोटर और 1 काला फ्रेम है और यह किसी बहुत बड़े कीड़े जैसा दिखता है. उन्होंने अंदाज़ा लगाया कि एक साल से ज़्यादा समय तक मोर्चे पर रहने के बाद व्लासेंको का वजन लगभग 70 किलो होगा. इसमें एक बड़ा जोखिम यह था कि रूस के छोटे ड्रोन अक्सर बड़े और धीमी गति से चलने वाले ड्रोनों को मार गिराते हैं. 

अक्टूबर की शुरुआत में व्लासेंको को अपने पार्सल में एक हार्नेस (सुरक्षा बेल्ट) और एक फोन मिला, जिसमें निर्देश देने वाले वीडियो थे. ‘ब्लैक’ नाम के पायलट ने यूक्रेनी और रूसी दोनों भाषाओं में कुछ नोट छोड़े थे. 4 अक्टूबर को उन्हें रेस्क्यू किया गया. उनके साथ 3 छोटे ड्रोन भी उड़ाए गए. 2 घंटे तक छोटे अटैक ड्रोन, तोपखाने और फिक्स्ड-विंग ड्रोनों ने रूस के उन ठिकानों पर हमला किया जहां उनके ड्रोन मौजूद थे. 

यूक्रेनी सेना इसे अपनी तरह का पहला रेस्क्यू अभियान मान रही है. व्लासेंको को खार्किव के एक सैन्य अस्पताल ले जाया गया. उनके कई ऑपरेशन हो चुके हैं. जब उनसे पूछा गया कि किस बात ने उन्हें हिम्मत दी, तो उन्होंने अपनी बेटी का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “मैंने काफी समय से अपनी बेटी से बात नहीं की है. शायद वह मुझे समझ पाएगी, क्योंकि उसके पिता युद्ध में थे.”

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