एक बार सिंचाई और 18 क्विंटल तक गेहूं! जानें इन 3 किस्मों की खासियत

एक बार सिंचाई और 18 क्विंटल तक गेहूं! जानें इन 3 किस्मों की खासियत


कम बारिश वाले इलाकों में किसानों के लिए ये किस्में फायदेमंद: इस बार मॉनसून में कम बारिश होने से कई इलाकों में खेतों की नमी घट गई है. ऐसे में रबी सीजन में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के सामने सिंचाई की बड़ी चुनौती है. खासकर जिन किसानों के पास पानी के पर्याप्त साधन नहीं हैं, वे ऐसी किस्मों की तलाश कर रहे हैं, जो कम सिंचाई में भी अच्छी पैदावार दे सकें.

HI-1500 अमृता गेहूं से कितनी मिलेगी पैदावार: गेहूं की HI-1500 किस्म को अमृता के नाम से भी जाना जाता है. यह कम पानी वाले इलाकों में खेती के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है. अनुकूल परिस्थितियों में इस किस्म से एक सिंचाई में करीब 14 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है. इसकी बुवाई 5 नवंबर के बाद की जा सकती है. एक एकड़ में करीब 40 से 45 किलो बीज की जरूरत बताई गई है.

HI-1500 अमृता गेहूं से कितनी मिलेगी पैदावार: गेहूं की HI-1500 किस्म को अमृता के नाम से भी जाना जाता है. यह कम पानी वाले इलाकों में खेती के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है. अनुकूल परिस्थितियों में इस किस्म से एक सिंचाई में करीब 14 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल सकता है. इसकी बुवाई 5 नवंबर के बाद की जा सकती है. एक एकड़ में करीब 40 से 45 किलो बीज की जरूरत बताई गई है.

सुजाता गेहूं की खेती में कितना पानी लगेगा: गेहूं की HI-617 किस्म को सुजाता के नाम से जाना जाता है. यह किस्म भी कम सिंचाई वाले इलाकों के लिए उपयोगी मानी जाती है. अच्छी देखभाल मिलने पर इससे एक एकड़ में 16 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. इसकी बुवाई के लिए करीब 30 से 35 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत बताई गई है. इस किस्म में लगभग 40 दिनों के आसपास सिंचाई की सलाह दी गई है.

सुजाता गेहूं की खेती में कितना पानी लगेगा: गेहूं की HI-617 किस्म को सुजाता के नाम से जाना जाता है. यह किस्म भी कम सिंचाई वाले इलाकों के लिए उपयोगी मानी जाती है. अच्छी देखभाल मिलने पर इससे एक एकड़ में 16 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. इसकी बुवाई के लिए करीब 30 से 35 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत बताई गई है. इस किस्म में लगभग 40 दिनों के आसपास सिंचाई की सलाह दी गई है.

C-306 शरबती गेहूं: अगर आपके खेत की मिट्टी हल्की है और सिंचाई के सीमित साधन हैं, तो आप C-306 शरबती गेहूं की खेती कर सकते हैं. यह किस्म अच्छी क्वालिटी के गेहूं के लिए जानी जाती है. कम सिंचाई वाली परिस्थितियों में इससे करीब 14 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार मिल सकती है. इसकी बुवाई के लिए 40 से 45 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत पड़ सकती है. फसल तैयार होने में करीब 130 दिन लग सकते हैं.

C-306 शरबती गेहूं: अगर आपके खेत की मिट्टी हल्की है और सिंचाई के सीमित साधन हैं, तो आप C-306 शरबती गेहूं की खेती कर सकते हैं. यह किस्म अच्छी क्वालिटी के गेहूं के लिए जानी जाती है. कम सिंचाई वाली परिस्थितियों में इससे करीब 14 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार मिल सकती है. इसकी बुवाई के लिए 40 से 45 किलो बीज प्रति एकड़ की जरूरत पड़ सकती है. फसल तैयार होने में करीब 130 दिन लग सकते हैं.

गेहूं की बुवाई से पहले कैसे तैयार करें खेत: कम पानी में गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे जरूरी है. किसान बुवाई के समय दो बोरी सिंगल सुपर फॉस्फेट, 20 किलो यूरिया और 15 किलो पोटाश डाल सकते है. हालांकि, यह मात्रा हर खेत के लिए एक जैसी नहीं हो सकती. किसानों को पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए और उसी के आधार पर खाद डालनी चाहिए.

गेहूं की बुवाई से पहले कैसे तैयार करें खेत: कम पानी में गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी सबसे जरूरी है. किसान बुवाई के समय दो बोरी सिंगल सुपर फॉस्फेट, 20 किलो यूरिया और 15 किलो पोटाश डाल सकते है. हालांकि, यह मात्रा हर खेत के लिए एक जैसी नहीं हो सकती. किसानों को पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए और उसी के आधार पर खाद डालनी चाहिए.

एक सिंचाई कब करें और यूरिया कितनी डालें: HI-1500 अमृता किस्म में बुवाई के करीब 35 से 45 दिनों के बीच सिंचाई करने की सलाह दी गई है. वहीं, सुजाता में लगभग 40 दिनों के आसपास पानी दिया जा सकता है. अमृता में सिंचाई के बाद 30 से 35 किलो और C-306 में करीब 30 किलो यूरिया प्रति एकड़ दे सकते हैं. हालांकि, यूरिया की सही मात्रा मिट्टी की जांच और पहले दी गई खाद के हिसाब से तय करें.

एक सिंचाई कब करें और यूरिया कितनी डालें: HI-1500 अमृता किस्म में बुवाई के करीब 35 से 45 दिनों के बीच सिंचाई करने की सलाह दी गई है. वहीं, सुजाता में लगभग 40 दिनों के आसपास पानी दिया जा सकता है. अमृता में सिंचाई के बाद 30 से 35 किलो और C-306 में करीब 30 किलो यूरिया प्रति एकड़ दे सकते हैं. हालांकि, यूरिया की सही मात्रा मिट्टी की जांच और पहले दी गई खाद के हिसाब से तय करें.

Published at : 27 Oct 2026 02:33 PM (IST)

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