PM Modi Appeal on Gold Petrol Diesel: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश की जनता से कई अपील कीं. पीएम मोदी ने कहा कि अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदना है. साथ ही उन्होंने पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने की भी अपील की. पीएम मोदी ने लोगों से विदेश यात्राओं को टालने का भी आह्वान किया. अब आंकड़ों से समझिए आखिरकार पीएम मोदी को ऐसी अपील क्यों करनी पड़ी. इसकी असल वजह क्या है.
दरअसल भारत हर साल विदेशों से 15 लाख करोड़ का कच्चा तेल खरीदता है और सात 7 लाख करोड़ का सोना भी खरीदता है. यह कीमत सरकार को डॉलर में चुकानी पड़ती है. बड़ी बात यह है कि कच्चा तेल और सोना, दोनों मिलकर देश के इंपोर्ट बिल का 30 फीसदी से ज्यादा है.
जितना खरीदेंगे, उतनी बढ़ेगी डॉलर की मांग
अब आसान भाषा में समझिए. तेल और सोने की जितनी ज़्यादा खरीद उतनी डॉलर की मांग भी बढ़ती है और जितनी मांग बढ़ती है, उतनी डॉलर की कीमत भी बढ़ जाती है. सीधे तौर पर हमारा रुपया कमजोर हो जाता है. अब रुपया जितना टूटता है, उतना कच्चा तेल और सोना खरीदना और महंगा हो जाता है. आज डॉलर का दाम करीब 96 रुपए है.
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अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव
दरअसल ईरान युद्ध के बाद से भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है. युद्ध शुरू होने के सिर्फ दो महीनों के अंदर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 38 बिलियन डॉलर गिरकर 691 बिलियन डॉलर पर आ गया है. अभी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100-105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है,
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात बिल लगभग दोगुना होकर 72 बिलियन डॉलर पहुंच गया है, जो 2022-23 में 35 बिलियन डॉलर था, इसमें सालाना 24 फीसदी की वृद्धि देखी गई है. विदेश यात्राओं और अन्य खर्चों के लिए भारत से बाहर जाने वाला पैसा काफी बढ़ गया है. अकेले विदेश यात्रा पर लगभग 15 बिलियन डॉलर खर्च हुए हैं. ऐसे में अगर जनता सोने की खरीद में 30 से 40 फीसदी की कमी करते हैं, तो देश की लगभग 20 से 25 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बच सकती है.
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सरकार की मंशा भी जान लीजिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील का मकसद बिना किसी तत्काल वित्तीय सख्ती, जैसे आयात शुल्क बढ़ाना के जनता की सोच में बदलाव लाकर आयात बिल को नियंत्रित करना है. इससे चालू खाता घाटे यानी करंट अकाउंट डेफेसिट को कम करने और रुपए को स्थिरता देने में मदद मिलेगी. इसके विकल्प के रूप में सरकार ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है, ताकि घरों में रखे बेकार सोने को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाया जा सके.






