रबी के मौसम में गेहूं की खेती किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है. अच्छी पैदावार पाने के लिए खेत की तैयारी और समय पर बुवाई के साथ सिंचाई का भी खास ध्यान रखना जरूरी है. खासकर पहली सिंचाई का फसल की बढ़त पर सीधा असर पड़ता है. अगर सही समय पर पानी नहीं दिया जाए, तो पौधों की जड़ों का विकास की प्रक्रिया प्रभावित होती है. आमतौर पर गेहूं की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद की जाती है. साथ ही यह सही समय मिट्टी की किस्म, खेत में मौजूद नमी और बुवाई के तरीके पर भी निर्भर करता है.
पहली सिंचाई कब करें?
गेहूं की फसल में पहली सिंचाई आमतौर पर बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए. इस समय पौधों में जड़ों का विकास तेजी से होता है. कृषि की भाषा में इस अवस्था को सीआरआई यानी ताजमूल अवस्था कहा जाता है. इस दौरान पौधे की जड़ें मजबूत होने लगती हैं और कल्ले निकलने की प्रक्रिया शुरू होती है. अगर इस समय खेत में नमी की कमी रहती है, तो पौधों की बढ़त पर असर पड़ता है और कल्ले कम निकलते हैं. इससे आगे चलकर गेहूं की पैदावार घटने का खतरा रहता है. इसलिए किसानों को फसल की अवस्था और खेत में नमी देखकर पहली सिंचाई का समय तय करना चाहिए.
यह भी पढ़ें : कपास की चुनाई के बाद न करें ये 6 गलतियां, वरना घट जाएगा भाव!
मिट्टी के हिसाब से तय करें सिंचाई का समय
गेहूं की फसल में पहली सिंचाई का समय हर खेत में एक जैसा नहीं होता. हल्की मिट्टी में पानी जल्दी सूख जाता है, इसलिए ऐसी जमीन में बुवाई के करीब 20 से 21 दिन बाद सिंचाई की जरूरत पड़ती है. वहीं, भारी या चिकनी मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक बनी रहती है. ऐसे खेतों में जरूरत के अनुसार पहली सिंचाई 25 दिन के आसपास की जाती है. अगर गेहूं की बुवाई जीरो टिलेज विधि से की गई है, तो कुछ परिस्थितियों में 15 से 18 दिन के भीतर भी सिंचाई की जरूरत पड़ती है. यह खेत की नमी और स्थानीय कृषि सलाह पर निर्भर करता है.
इन बातों का रखें ध्यान
गेहूं की फसल में पहली सिंचाई करते समय खेत में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से बचना चाहिए. पानी इतना दें कि मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहे और पौधों की जड़ों तक पानी पहुंच सके. खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा, अगर बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी है, तो सिंचाई की जरूरत का आकलन उसी के अनुसार करें. पहली सिंचाई में लापरवाही करने से पौधों का विकास प्रभावित हो सकता है. इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए.
यह भी पढ़ें : समय से पहले कैसे तैयार हो जाती है फसल, क्या है लो टनल तकनीक?






