दुनिया भर में बिकने वाले कुल मखाने का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अकेले बिहार से ही निकलता है. मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद से तो इसकी इंटरनेशनल डिमांड सातवें आसमान पर पहुंच चुकी है. अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के सुपरमार्केट्स में इसकी भारी मांग है. अब सरकार चाहती है कि हमारे लोकल किसान ग्लोबल मार्केट के तगड़े प्लेयर बनें.

पहले मखाने की पहचान सिर्फ मिथिलांचल के गिने-चुने जिलों तक सीमित थी. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदलने जा रही है. सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाकर पूरे 21 जिलों में फैला दिया है. अब इन सभी चुनिंदा जिलों के किसान भी इस बंपर सब्सिडी स्कीम का पूरा फायदा उठा सकेंगे और आधुनिक तरीके से मखाना की खेती शुरू कर सकेंगे.

इस नई लिस्ट में दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सीतामढ़ी, खगड़िया, समस्तीपुर और भागलपुर शामिल हैं. इनके अलावा सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली और राजधानी पटना के किसानों को भी इस योजना से जोड़ा गया है. इन 21 जिलों में अब मखाना क्रांति का नया दौर देखने को मिलेगा.

सरकार का सबसे बड़ा फोकस यह है कि सब्सिडी का पैसा किसी बिचौलिए के हाथ न लगे. पूरी सहायता राशि डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में भेजी जा रही है. 75 फीसदी खर्च सरकार खुद उठाएगी जिससे नए किसानों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और वे बेझिझक नई तकनीक में इन्वेस्ट कर पाएंगे.

अब मखाना उगाने के लिए सिर्फ बड़े तालाबों पर निर्भर रहने की मजबूरी पूरी तरह खत्म हो गई है. अब सामान्य खेतों में भी पानी रोककर इसकी शानदार खेती हो रही है. किसानों को सबौर मखाना-1 और स्वर्ण वैदेही जैसी हाइब्रिड किस्मों के टॉप बीज दिए जा रहे हैं. इन हाई-यील्ड बीजों से पैदावार तो बढ़ती ही है दाना भी बड़ा निकलता है.

मखाना निकालना और भूनकर फोड़ना हमेशा से बहुत मेहनत और जोखिम भरा काम रहा है. इस दिक्कत को दूर करने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग किट पर भी 75 प्रतिशत सब्सिडी मिल रही है. इससे समय बचेगा और महिलाओं को भारी राहत मिलेगी. नई मशीनों से काम तेज होगा और चोट लगने का डर भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

सरकार किसानों को सिर्फ कच्चा मखाना बेचने तक सीमित नहीं रखना चाहती. असली मुनाफा तो पैकेज्ड प्रोडक्ट्स में छिपा है. इसलिए मखाना पाउडर, रोस्टेड स्नैक्स, रेडी-टू-ईट खीर मिक्स और फ्लेवर्ड पॉपकॉर्न बनाने पर जोर दिया जा रहा है. किसान खुद प्रोसेसिंग और सुंदर पैकेजिंग करके सीधे शहरों के कैफे और मॉल्स में अपना माल बेचकर डबल मुनाफा कमा सकेंगे.

अगर आप भी इस सरकारी स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं. तो प्रोसेस बेहद आसान और पारदर्शी है. किसान, एफपीओ और महिला स्वयं सहायता समूह उद्यान निदेशालय की ऑफिशियल वेबसाइट या बिहार कृषि ऐप पर जाकर घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. सरकारी मदद का सही इस्तेमाल करके अपने खेत से लाखों का मुनाफा कमाने का यह सबसे सही वक्त है.
Published at : 10 Sep 2026 01:18 PM (IST)






