संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने कहा है कि ईरान अपने कामों की वजह से दुनिया में अलग-थलग पड़ता जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में गैरकानूनी गतिविधियां कर रहा है. इसमें समुद्र में माइन बिछाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना शामिल है. माइक वाल्ट्ज़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को 113 देशों का समर्थन मिला है. इस प्रस्ताव में ईरान की गतिविधियों की आलोचना की गई है.
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने यह भी कहा कि भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने भी इस पहल का समर्थन किया है. अमेरिका का कहना है कि ईरान की गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर असर पड़ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. ऐसे में वहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.
Iran is ISOLATED in its illegal actions to mine international waters and charge tolls. See the list of 113 co-sponsors of the UN Secuirty Council Resolution – including India, Japan, and South Korea – demanding Iran STOP its illegal and unacceptable behavior👇 https://t.co/l5bXAw2aX1
— Ambassador Mike Waltz (@USAmbUN) May 13, 2026
ये भी पढ़ें: अमेरिका के साथ जंग के बीच भारत पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अराघची, PM मोदी-एस जयशंकर से आज होगी मुलाकात
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर
अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से सीजफायर है. दोनों देशों के बीच हालात इतने खराब हो गए थे कि पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बढ़ गया था. इसके बाद अप्रैल 2026 में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम यानी सीजफायर लागू किया गया, जिससे हालात कुछ समय के लिए शांत हुए. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में इस सीजफायर को आगे बढ़ाने की घोषणा की, लेकिन साथ ही ईरान पर दबाव भी बनाए रखा. अमेरिका लगातार ईरान की सैन्य गतिविधियों और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. दूसरी तरफ ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा. ईरान का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा.





