तिब्बत में गुरुवार रात एक के बाद एक कई शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सबसे तेज भूकंप स्थानीय समयानुसार रात करीब 10 बजकर 33 मिनट (भारतीय समयानुसार रात 08:03:42 बजे) पर महसूस किया गया. रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 7.0 दर्ज की गई. चार घंटे के दौरान तिब्बत में भूकंप के 13 झटके महसूस किए गए. वहीं चीन में भी कई बार भूकंप के झटके महसूस हुए.
भूकंप के तेज झटके के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया. हालांकि राहत की बात ये है कि प्राथमिक रिपोर्टों में अब तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तिब्बती पठार को बेहद संवेदनशील और भूकंप-संभावित क्षेत्र माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र ठीक उस स्थान पर स्थित है जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट आपस में मिलती हैं.
| भूकंप की टाइमिंग (भारतीय समयानुसार) | तीव्रता |
| रात 12:01:53 बजे (23 अक्टूबर) | 4.3 |
| रात 08:03:42 बजे | 7.0 |
| रात 08:42:33 बजे | 5.0 |
| रात 09:09:20 बजे | 5.0 |
| रात 09:15:41 बजे | 5.0 |
| रात 09:47:11 बजे | 4.8 |
| रात 09:51:58 बजे | 4.6 |
| रात 10:20:21 बजे | 4.7 |
| रात 10:28:05 बजे | 4.7 |
| रात 10:40:30 बजे | 4.6 |
| रात 11:17:08 बजे | 4.3 |
| रात 11:36:54 बजे | 4.8 |
| रात 11:55:23 बजे | 4.4 |
इन दोनों विशाल प्लेटों के बीच लगातार होने वाली अंदरूनी हलचल और टक्कर के कारण यहां समय-समय पर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं. स्थिति पर फिलहाल आपदा प्रबंधन दल नजर बनाए हुए हैं. यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र पिछले महीने आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से उबरने की कोशिश कर रहा है. भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में था. इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित था.
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा सकती हैं. इस भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जहां लोग अभी हाल की आपदाओं के प्रभावों से जूझ रहे हैं.यह भूकंप उस विनाशकारी घटना के कुछ हफ्ते बाद आया है, जब 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के बड़े लैंडस्लाइड के कारण भीषण फ्लैश फ्लड आई थी.





