जहां एक तरफ कुछ महीनों पहले ही भारत में पेट्रोल- डीजल की कमी देखी जा रही थी. वहीं अब आने वाले समय में भारत डीजल का सबसे बड़ा सप्लायर बनने वाला है. क्योंकि साल 2027 में भारत का डीजल निर्यात तेजी से बढ़ने वाला है. सरकारी तेल कंपनियां अपनी रिफाइनरियों की क्षमता बढ़ा रही हैं, जिससे देश में डीजल का उत्पादन बढ़ेगा.
डीजल का उत्पादन बढ़ने से देश ना केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि दूसरे देशों को भी ज्यादा डीजल बेच सकेगा. ये जानकारी मंगलवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दी है. उन्होंने कहा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की भूमिका और मजबूत होगी.
भारत करेगा दुनिया की जरूरतें पूरी
हाल ही में एक प्रोग्राम में शामिल हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि, भारत ऐसी स्थिति में पहुंच रहा है, जहां वो अपनी जरूरतों के साथ-साथ दुनिया की जरूरतों के लिए भी तेल को रिफाइन कर सकेगा. भारत अपनी तेल रिफाइनिंग कैपेसिटी को साल 2030 तक बढ़ाकर सालाना 300 मिलियन टन करना चाहता है. इसके बाद इसे बढ़ाकर 400 मिलियन टन सालाना करने की प्लानिंग है.
जहां दुनिया के कई देशों में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही है, वहीं भारत अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर इस मौके का फायदा उठाने की तैयारी कर रहा है.
भारत बना दुनिया का दूसरा बड़ा डीजल निर्यातक
Kpler के जहाजों की आवाजाही से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस साल भारत समुद्र के रास्ते डीजल निर्यात करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. इस मामले में अमेरिका पहले नंबर पर है. तो वहीं भारत की बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता का एक और फायदा ये है कि यहां की रिफाइनरियां अलग-अलग तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती हैं. इससे तेल कंपनियों को बाजार की कीमतों के हिसाब से बेहतर ऑप्शन चुनने और ज्यादा दाम वाले उत्पाद बनाने में मदद मिलती है.
बता दें कि दुनिया में अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे तनाव और संघर्ष के कारण तेल की सप्लाई इस साल प्रभावित हुई है. इसके अलावा, कई रिफाइनरियों के बंद होने से भी ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ा है. ऐसे में भारत दूसरे देशों को डीजल की सप्लाई करने वाला एक प्रमुख देश बनकर उभर रहा है.
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