Kamakhya Temple: असम की राजनीति में आज 12 मई को हिमंत बिस्वा सरमा का नाम राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में शामिल हो चुका है. असम चुनाव में एनडीए की सरकार ने भारी बहुत से जीत हासिल की और दूसरी बार हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री (CM Himanta Biswa Sarma) बनाया गया.
मुख्यमंत्री पद की शपथ (Assam Oath) लेने से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने मां कामाख्या को याद किया. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा- मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के आशीर्वाद से असम के लोगों का जीवन सुख, शांति और समृद्धि की ओर आगे बढ़ेगा. मां कामाख्या के आशीर्वाद से असम आने वाले दिनों में विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा.
हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब असम की राजनीति में मां कामाख्या का जिक्र हुआ हो. गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या का मंदिर हमेशा से ही राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. चुनाव के पहले से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक यहां राजनेता माथा टेकने पहुंचते हैं. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेता कामाख्या शक्तिपीठ पर पहुंचते हैं.
शपथ ग्रहण से पहले नेताओं ने किए मां कामाख्या के दर्शन
आज 12 मई को असम में मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह के लिए कई नेताओं की मौजूदी रही. भाजपा (BJP) और एनडीए (NDA) के कई नेताओं ने समारोह में शामिल होने से पहले मां कामाख्या के दर्शन किए. इनमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta), गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नाम शामिल हैं. इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी गुवाहाटी पहुंचकर मां कामाख्या का आशीर्वाद लिया. राजनेताओं का मां कामाख्या के दरबार पहुंचकर आशीर्वाद लेना सिर्फ धार्मिक परंपरा या विश्वास ही नहीं बल्कि बल्कि असम की राजनीतिक संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
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51 शक्ति पीठों में से एक है मां कामाख्या
गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर को देवी के 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर देवी सती का योनिभाग गिरा था. इसलिए कामाख्या देवी को शक्ति और सृजन का प्रतीक माना जाता है. योनि भाग होने के कारण यहां देवी रजस्वला (menstruation) भी होती है. यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां साल में एक बार देवी कामाख्या को मासिक धर्म होता है. देवी जब मासिक चक्र में होती हैं तो तीन दिनों के लिए मंदिर भी बंद रहता है और देवी का दर्शन भी वर्जित रहता है.
कामाख्या मंदिर को विशेषरूप से तंत्र साधना और शक्ति उपासना का केंद्र माना जाता है. यहां देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, लेकिन असम की राजनीति में कामाख्या मंदिर का प्रभाव इतना गहरा है कि चुनावी माहौल में यहां नेताओं की आवाजाही बढ़ जाती है.
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