Rog Panchak May 2026: ज्योतष में पंचक को अशुभ काल माना गया है. दरअसल नक्षत्र चक्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं. इनमें अंतिम के पांच नक्षत्र दूतषत माने गए हैं. पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में प्रवेश करता है और 5 नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) से होकर गुजरता है.
मई 2026 में पंचक कब
मई 2026 में हिंदू कैलेंडर का ज्येष्ठ माह रहेगा. इस महीने 10 मई से लेकर 14 मई तक पंचक रहेगा. रविवार को पंचक शुरू होने के कारण इसे रोग पंचक कहा जाएगा. अलग-अलग वार में शुरू होने वाले पंचक के नाम भी अलग-अलग होते हैं. मई महीने में लगने वाला पंचक ‘रोग पंचक’ रहेगा. रोग पंचक की शुरुआत रविवार 10 मई को दोपहर 12 बजकर 08 मिनट पर शुरू होगी और गुरुवार 14 मई को रात 10 बजकर 34 मिनट पर समाप्त हो जाएगी.
क्या होता है रोग पंचक
रोग पंचक को ज्योतिष में पंचक के पांच प्रकारों में सबसे संवेदनशील माना जाता है. क्योंकि रोग पंचक का संबंध सेहत, ऊर्जा और मानसिक संतुलन से होता है. रोग पंचक तब लगता है, जब चंद्रमा विशेष नक्षत्रों (धनिष्ठा से रेवती तक) में गोचर करता है.
मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार, पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र है यानी इस नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना अधिक होती है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास बताते हैं कि, रोग पंचक की अवधि में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, पुरानी बीमारी उभर सकती है या फिर मानसिक तनाव और थकान बढ़ने की संभावना अधिक रहती है. साथ ही रोग पंचक का समय शुभ कार्यों के लिए भी अच्छा नहीं माना जाता है. इसलिए रोग पंचक को अशुभ माना जाता है. इसलिए रोग पंचक के पांच दिनों की अवधि में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.
रोग पंचक से किन्हें अधिक खतरा!
रोग पंचक की अवधि में वैसे तो सभी को सावधान रहने की जरूरत है. लेकिन कुछ लोगों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ता है, इसलिए ये लोग सतर्क रहें. जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी हो, बुजुर्ग व बच्चे, मानसिक तनाव या एंग्जायटी से ग्रसित लोग और अधिक यात्रा या भागदौड़ करने वाले लोग रोग पंचक के दौरान सावधान रहें और अपना विशेष ध्यान रखें.
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रोग पंचक में वर्जित कार्य
- घर का निर्माण न करें
- दक्षिण दिशा की यात्रा न करें
- शव दाह संस्कार में विशेष नियमों का पालन करें
- लकड़ियों को इकट्ठा न करें
- इसके अलावा रोग पंचक की अवधि में विवाह, सगाई, यात्रा, नामकरण, गृह प्रवेश या फिर नए व्यवसाय की शुरुआत भी नहीं करनी चाहिए.
रोग पंचक में क्या कर सकते हैं
- भगवान विष्णु या शिव की पूजा करें.
- “ॐ नमो नारायणाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप करें.
- गाय, पशु-पक्षियों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं.
- मानसिक और शारीरिक लाभ के लिए ध्यान और योग करें
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