हर घर के किचन में अरहर, मसूर, चना और दूसरी दालों की खास जगह होती है. लोगों की नजर भी दालों की कीमत पर रहती है. अगर इसके दाम में इजाफा होता है तो जाहिर सी बात है कि इससे लोगों के किचन का बजट बिगड़ सकता है. ऐसे में अब भारत में दालों का विदेशी आयात भी तेजी से बढ़ा है.
बता दें कि (फाइनेंशियल ईयर 2026- 27) के अप्रैल से अगस्त के बीच दालों का आयात पिछले साल की तुलना में इसी अवधि के मुकाबले 67 प्रतिशत बढ़कर 2.06 मिलियन टन हो गया है. अब सबसे अहम सवाल ये है कि क्या कुछ समय बाद दालें महंगी हो सकती हैं?
पिछले साल से महंगी हुई दाल
जानने वाली बात तो ये है कि कई दालें पिछले साल के मुकाबले में काफी महंगी हुई है जैसे…
- अरहर – 132.75 रुपये प्रति किलो है, पिछले साल से 15 प्रतिशत महंगी है.
- वहीं उड़द दाल 125.46 रुपये प्रति किलो है, पिछले साल से 10 प्रतिशत महंगी है.
- इसके अलावा चना दाल- 93.48 रुपये प्रति किलो है, पिछले साल से 7.5 प्रतिशत महंगी है.
दालें महंगी क्यों हो रही हैं?
- रूस यूक्रेन संघर्ष की वजह से रूस से आपूर्ति पर असर पड़ा. इससे कनाडा से जो मसूर दाल और पीली मटर आती है, उसकी कीमतों पर असर पड़ा है.
- साथ ही चना, पीली मटर और मसूल दाल पर आयात शुल्क लगता है. इससे इन्हें विदेश से खरीदने की लागत भी बढ़ सकती है.
- वहीं महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में कम बारिश से दालों की फसल पर असर को लेकर चिंता बनी हुई है.
दालें मंगाने पर बढ़ा खर्च
भारत में दालों के आयात की मात्रा तो बढ़ी ही है. इसके साथ ही इन्हें खरीदने पर जो खर्च हुआ है वो भी बढा है. फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के अप्रैल से अगस्त के बीच आयात पर 1.18 अरब डॉलर खर्च किए गए. बड़ी बात तो ये है कि ये पिछले साल की समान अवधि से 38 प्रतिशत ज्यादा है.
क्या आगे बढ़ेंगे दालों के दाम?
अब सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में दालों की कीमतों में इजाफा हो सकता है? दालों के दाम में कोई बढ़ोतरी होगी या नहीं, ये बात फसर, विदेशी आपूर्ति और मौसम पर निर्भर करता है. वहीं सरकार के पास लगभग 4.5 मिलियन टन दालों का भंडार है. ऐसे में कीमत बढ़ेंगी या नहीं ये तय नहीं है. . हां, लेकिन अगर किसी कारणवश दालों का दाम में बढ़ोतरी होती है तो जाहिर सी बात है कि इसका असर आम लोगों के किचन के बजट को बिगड़ सकता है.
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