सर्दियों के मौमस में देसी अंडों को लोग काफी पसंद करते हैं. ऐसे में किसान खेती के साथ देसी मुर्गी पालन शुरू करके अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं. अच्छी बात यह है कि, इसके लिए शुरुआत में बहुत ज्यादा पैसे लगाने की जरूरत नहीं होती. किसान अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से मुर्गियां पाल सकते हैं.

देसी मुर्गी पालन की खास बात यह है कि, इससे किसानों को कमाई के दो मौके मिलते हैं. एक तरफ मुर्गियों के अंडे बेचकर पैसे कमाए जा सकते हैं, तो दूसरी तरफ मुर्गे और मुर्गियों को मांस के लिए भी बेचा जा सकता है. गांवों के साथ शहरों में भी देसी अंडों और मांस की मांग रहती है.

देसी मुर्गी पालन शुरू करने के लिए एक साथ बहुत सारी मुर्गियां खरीदना जरूरी नहीं है. किसान पहले कम संख्या में मुर्गियां पालकर उनके खान-पान, देखभाल और बाजार में बिक्री का तरीका समझ सकते हैं. जब अनुभव बढ़ जाए और कमाई होने लगे, तब धीरे-धीरे मुर्गियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है.

मुर्गियों की अच्छी बढ़वार के लिए उनका खान-पान सबसे जरूरी है. उन्हें उम्र और जरूरत के हिसाब से संतुलित दाना देना चाहिए. साथ ही पीने के लिए हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं. पानी और दाने के बर्तनों को भी नियमित साफ करें. सही आहार मिलने से मुर्गियों की सेहत अच्छी रहती है और अंडों के उत्पादन में भी मदद मिलती है.

देसी मुर्गी पालन में साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए. मुर्गियों के रहने की जगह सूखी, साफ और हवादार होनी चाहिए. शेड में पानी या गंदगी जमा न होने दें, क्योंकि इससे बीमारियां फैल सकती हैं. सर्दियों में मुर्गियों को ठंडी हवा और ज्यादा नमी से बचाना भी जरूरी है. समय पर टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सक की सलाह लें.

अच्छी देखभाल और संतुलित आहार मिलने पर कुछ मुर्गियों का वजन करीब 12 सप्ताह में 2 किलो तक पहुंच सकता है. वहीं, कुछ उन्नत किस्मों की मुर्गियां करीब 16 सप्ताह के बाद अंडे देना शुरू कर सकती हैं. सामान्य देसी नस्लों में इससे ज्यादा समय लग सकता है. इसलिए किसान मुर्गियां खरीदते समय उनकी नस्ल और उत्पादन क्षमता की जानकारी जरूर लें.
Published at : 26 Oct 2026 04:26 PM (IST)






