इस भयानक बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले सही किस्म चुनना जरूरी है. अगर आपके इलाके में यह रोग तेजी से फैल रहा है. तो कमजोर या जल्दी बीमारी पकड़ने वाली वैरायटी बिल्कुल न लगाएं. हमेशा अपनी नजदीकी चीनी मिल या कृषि केंद्र से प्रमाणित रोग रोधी किस्मों के बीज ही लाएं. इसके साथ ही स्वस्थ खेत से ही बीज का गन्ना चुनना चाहिए.

खेत में गन्ना बोने से पहले बीज शोधन जरूर करें यह आधा खतरा वहीं खत्म कर देता है. बीज के टुकड़ों को सीधे जमीन में दबाने के बजाय फफूंदनाशक दवा के पानी में डुबोएं. इसके लिए कार्बेंडाजिम या थायोफैनेट मिथाइल का घोल तैयार करें और टुकड़ों को पंद्रह मिनट भिगोकर रखें. ऐसा करने से बीज पर चिपकी फंगस तुरंत आसानी से खत्म हो जाती है.

कई बार फंगस बीज की पोरियों के भीतर गहराई में छिपी होती है. जहां नार्मल दवा काम नहीं कर पाती. इसके लिए गर्म पानी का ट्रीटमेंट सबसे सबी तरीका है. लगभग 52 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में बीज को कुछ देर रखने से अंदर की फंगस भी मर जाती है. यह वैज्ञानिक तरीका फसल को रेड रॉट से बचाने में बहुत मददगार है.

बीज के साथ-साथ खेत की मिट्टी को भी बीमारियों से बचाना बेहद जरूरी है. इसके लिए ट्राइकोडर्मा सबसे बढ़िया साबित होता है. बुवाई से पहले सड़ी हुई गोबर की खाद में ट्राइकोडर्मा मिलाकर कुछ दिन छांव में ढककर रख दें. जब यह अच्छे से फैल जाए, तो खेत की आखिरी जुताई के समय इसे पूरी जमीन में समान रूप से बिखेर दें.

रेड रॉट की फंगस बहते पानी के सहारे पूरे खेत में बहुत तेजी से फैलती है. इसलिए खेत में कभी भी बारिश या जरूरत से ज्यादा सिंचाई का पानी जमा न रहने दें. खेत में जल निकासी का पुख्ता इंतजाम रखें. ध्यान रहे कि बीमार खेत का पानी किसी स्वस्थ खेत में न जाए वरना बाकी खड़ी फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी.

फसल की समय-समय पर देखभाल और निगरानी करना बहुत जरूरी है. अगर किसी पौधे की तीसरी या चौथी पत्ती ऊपर से पीली या सूखी दिखे, तो उस पूरे पौधे को तुरंत जड़ सहित उखाड़ लें. उसे खेत से बाहर ले जाकर गड्ढे में दबाएं या जला दें. इसके साथ ही उस जगह पर तुरंत ब्लीचिंग पाउडर डाल दें जिससे कि बीमारी आगे न फैले.

जिस खेत में लाल सड़न रोग का असर दिखा हो उसमें अगली बार गन्ने की पेड़ी फसल बिल्कुल न लें. पेड़ी में यह फंगस दोगुनी रफ्तार से हमला करती है. ऐसे खेत को कम से कम दो साल तक गन्ने से खाली रखकर धान या दाल वाली फसलें लगाएं. फसल चक्र बदलने से मिट्टी में मौजूद बीमारी का फंगस खुद ही खत्म हो जाता है.

गन्ने की फसल में सिर्फ यूरिया यानी नाइट्रोजन डालने की गलती बिल्कुल न करें. ज्यादा यूरिया देने से पौधा नाजुक बनता है और उस पर बीमारियां जल्दी धावा बोलती हैं. नाइट्रोजन के साथ पोटाश और फास्फोरस का सही बैलेंस बनाए रखें जिससे गन्ना मजबूत बने. समय रहते यह आसान तरीके अपनाकर किसान अपनी मेहनत और उससे बोने वाली कमाई दोनों बचा सकते हैं.
Published at : 26 Aug 2026 12:47 PM (IST)
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