सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के स्कूलों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने और उसे भविष्य में शिक्षा का माध्यम बनाने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया है कि शिक्षा सिर्फ संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में ही दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उस याचिका पर दिया है जिसमें राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में शामिल न करने को चुनौती दी गई थी.
राजस्थान हाई कोर्ट ने रीट परीक्षा में राजस्थानी भाषा को शामिल न करने को सही ठहराया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को पलट दिया है. साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह राजस्थानी भाषा को मान्यता देने और उसे बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति बनाए. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा है कि इस नीति के तहत स्कूलों में राजस्थानी भाषा की पढ़ाई शुरू की जाए और आगे चल कर उसे शिक्षा का माध्यम बनाया जाए.
कोर्ट ने कहा है कि राजस्थानी को क्षेत्रीय भाषा के रूप में दर्जा देते हुए शिक्षा में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाए. पहले प्राथमिक स्तर पर इसे एक विषय के रूप में लागू किया जाए. धीरे-धीरे उसे आगे बढ़ाया जाए. जजों ने कहा कि स्कूली शिक्षा में राजस्थानी की उपेक्षा गलत है. छात्रों को अपनी मातृभाषा में सीखने का अधिकार मिलना चाहिए.
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याचिकाकर्ता पदम सिंह और कल्याण सिंह शेखावत की तरफ से दलील रखी गई थी कि राजस्थान विधानसभा दो दशक पहले ही राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है. 2011 की जनगणना के मुताबिक राजस्थान में 4.36 करोड़ से अधिक लोग राजस्थानी बोलते हैं. फिर भी इसे शिक्षक पात्रता परीक्षा के पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया है. वहीं पंजाबी, गुजराती, सिंधी और उर्दू जैसी भाषाओं को इसमें जगह दी गई है. याचिकाकर्ताओं ने इसे स्थानीय अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव बताया था.
याचिका में यह दलील भी दी गई थी कि स्कूलों में राजस्थानी भाषा न पढ़ाना संविधान के अनुच्छेद 350A, राइट टू एजुकेशन एक्ट की धारा 29 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का है. उनका कहना था कि यह सभी प्रावधान बच्चों को उनकी प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने पर जोर देते हैं.
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा था कि शिक्षा संविधान की आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं में ही दी जा सकती है. लेकिन कोर्ट ने इस दलील को ठुकरा दिया. कोर्ट ने कहा कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा पढ़ाई जा रही है. ऐसे में इसे स्कूली स्तर पर इसे लागू करने में आनाकानी सही नहीं कही जा सकती.






