अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने लाव-लश्कर के साथ 2 दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंचे हैं. उनके साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर, एरिक ट्रंप और लॉरा ट्रंप समेत कई अन्य लोग हैं. गुरुवार (14 मई) को बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. मीटिंग के दौरान जिनपिंग और ट्रंप ने एक-दूसरे की तारीफ की. चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि हम सहयोगी हैं, प्रतिद्वंदी नहीं हैं.
दोनों नेताओं के बीच चर्चा के कई विषयों में व्यापार और अर्थव्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण बने हुए हैं. बता दें कि व्यापारिक संबंधों में तनाव के चलते अमेरिकी कंपनियां चीन के बाहर आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही हैं, जबकि चीनी कंपनियां अब अमेरिका से इतर यूरोप की ओर रुख कर रही हैं.
चीन को सोयाबीन बेचना चाहते हैं ट्रंप
चीन ने सोयाबीन की खरीद बंद कर दी है और ऐसे में ट्रंप चीन को और अधिक अमेरिकी कृषि उत्पाद बीफ और सोयाबीन भी बेचना चाहते हैं. साथ ही वह अमेरिका में चीनी निवेश बढ़ाने के पक्ष में हैं, लेकिन जिन प्रमुख मुद्दों पर ट्रंप जोर दे रहे हैं, उनमें से एक है 1.4 अरब लोगों वाले चीनी बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना. उनका मानना है कि चीन लंबे समय से बेहद संरक्षणवादी नीति अपनाता रहा है.
संयुक्त व्यापार बोर्ड बनाने का प्रस्ताव
इसी दिशा में ट्रंप चीन को एक संयुक्त व्यापार बोर्ड बनाने का प्रस्ताव देना चाहते हैं, जहां दोनों देश बैठकर द्विपक्षीय व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकाल सकें. स्पष्ट है कि ट्रंप इस यात्रा से कोई आर्थिक उपलब्धि हासिल करके ही अमेरिका लौटना चाहते हैं.
इसके अलावा टैरिफ के मुद्दे पर चीन स्थिरता चाहता है क्योंकि एक समय ट्रंप ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था. बीजिंग ऐसी व्यवस्था चाहता है जो लंबे समय तक कायम रहे और किसी सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर अचानक न बदल जाए.
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