शहद उत्पादन में दुनिया में नंबर-1 कौन, जानें भारत का नंबर?

शहद उत्पादन में दुनिया में नंबर-1 कौन, जानें भारत का नंबर?


ग्लोबल रैंकिंग पर नजर डालें तो चीन दुनिया का सबसे बड़ा शहद उत्पादक देश बना हुआ है. चीन सालाना करीब 5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा शहद का उत्पादन अकेले करता है. बड़े पैमाने पर मॉडर्न एपिकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस टेक्नोलॉजी और मजबूत सप्लाई चैन के चलते ग्लोबल शहद सप्लाई में चीन की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई बनी हुई है.

रैंकिंग में दूसरे और तीसरे पायदान पर तुर्किये और ईरान काबिज हैं. तुर्किये हर साल 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक शहद का उत्पादन कर यूरोपीय और खाड़ी देशों को सप्लाई करता है. इसके अलावा ईरान और रूस जैसे देश अपने बड़े वन क्षेत्रों और पारंपरिक मधुमक्खी पालन नेटवर्क के दम पर टॉप पांच उत्पादक देशों में शामिल हैं.

रैंकिंग में दूसरे और तीसरे पायदान पर तुर्किये और ईरान काबिज हैं. तुर्किये हर साल 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक शहद का उत्पादन कर यूरोपीय और खाड़ी देशों को सप्लाई करता है. इसके अलावा ईरान और रूस जैसे देश अपने बड़े वन क्षेत्रों और पारंपरिक मधुमक्खी पालन नेटवर्क के दम पर टॉप पांच उत्पादक देशों में शामिल हैं.

अगर भारत की बात करें तो देश दुनिया के टॉप शहद उत्पादक देशों की लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुंच गया है. कृषि मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक भारत का सालाना शहद उत्पादन अब 1.40 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े को पार कर चुका है जो पिछले एक दशक में सबसे तेज ग्रोथ रेट है.

अगर भारत की बात करें तो देश दुनिया के टॉप शहद उत्पादक देशों की लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुंच गया है. कृषि मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक भारत का सालाना शहद उत्पादन अब 1.40 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े को पार कर चुका है जो पिछले एक दशक में सबसे तेज ग्रोथ रेट है.

भारत में इस ग्रोथ की मुख्य वजह केंद्र सरकार का नेशनल बी-कीपिंग एंड हनी मिशन है. स्वीट रेवोल्यूशन के तहत सरकार ने मधुमक्खी पालकों को फाइनेंशियल सब्सिडी, मॉडर्न बी-बॉक्सेस और साइंटिफिक ट्रेनिंग मुहैया कराई है. इससे ग्रामीण इलाकों में छोटे किसानों को एक्स्ट्रा इनकम का मजबूत जरिया मिला और कुल प्रोडक्शन में तेज उछाल आया.

भारत में इस ग्रोथ की मुख्य वजह केंद्र सरकार का नेशनल बी-कीपिंग एंड हनी मिशन है. स्वीट रेवोल्यूशन के तहत सरकार ने मधुमक्खी पालकों को फाइनेंशियल सब्सिडी, मॉडर्न बी-बॉक्सेस और साइंटिफिक ट्रेनिंग मुहैया कराई है. इससे ग्रामीण इलाकों में छोटे किसानों को एक्स्ट्रा इनकम का मजबूत जरिया मिला और कुल प्रोडक्शन में तेज उछाल आया.

राज्यों के हिसाब से बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार और राजस्थान देश के प्रमुख शहद उत्पादक राज्य बनकर उभरे हैं. इनमें सरसों, लीची और नीलगिरी के सीजन में सबसे ज्यादा शहद तैयार किया जाता है. अकेले उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल मिलकर देश के कुल शहद उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा कंट्रीब्यूट करते हैं.

राज्यों के हिसाब से बात करें तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार और राजस्थान देश के प्रमुख शहद उत्पादक राज्य बनकर उभरे हैं. इनमें सरसों, लीची और नीलगिरी के सीजन में सबसे ज्यादा शहद तैयार किया जाता है. अकेले उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल मिलकर देश के कुल शहद उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा कंट्रीब्यूट करते हैं.

उत्पादन के साथ-साथ भारत ग्लोबल शहद एक्सपोर्ट में भी काफी आगे खड़ा नजर आता है. भारत हर साल लगभग 75 से 80 हजार मीट्रिक टन शहद एक्सपोर्ट करता है. अमेरिका भारतीय शहद का सबसे बड़ा खरीदार है. जबकि यूएई, सऊदी अरब और कनाडा जैसे देशों में भी भारतीय नेचुरल हनी की भारी सप्लाई हो रही है.

उत्पादन के साथ-साथ भारत ग्लोबल शहद एक्सपोर्ट में भी काफी आगे खड़ा नजर आता है. भारत हर साल लगभग 75 से 80 हजार मीट्रिक टन शहद एक्सपोर्ट करता है. अमेरिका भारतीय शहद का सबसे बड़ा खरीदार है. जबकि यूएई, सऊदी अरब और कनाडा जैसे देशों में भी भारतीय नेचुरल हनी की भारी सप्लाई हो रही है.

हालांकि इस सेक्टर के सामने सबसे बड़ा चैलेंज इंटरनेशनल मार्केट्स में सख्त क्वालिटी रूल्स और मिलावट को रोकना है. भारतीय शहद का भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार ने नेशनल लेवल पर न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस टेस्टिंग को बहुत जरूरी कर दिया है. जिससे विदेशी खरीदारों को असली और शुद्ध शहद की पक्की गारंटी मिल सके.

हालांकि इस सेक्टर के सामने सबसे बड़ा चैलेंज इंटरनेशनल मार्केट्स में सख्त क्वालिटी रूल्स और मिलावट को रोकना है. भारतीय शहद का भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार ने नेशनल लेवल पर न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस टेस्टिंग को बहुत जरूरी कर दिया है. जिससे विदेशी खरीदारों को असली और शुद्ध शहद की पक्की गारंटी मिल सके.

मार्केट जानकारों का मानना है कि संगठित क्लस्टर्स, बेहतर प्रोसेसिंग यूनिट्स और टेस्टिंग लैब्स के विस्तार से भारत का हनी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिस रफ्तार से घरेलू उत्पादन और एक्सपोर्ट बढ़ रहा है. उससे उम्मीद है कि भारत जल्द ही दुनिया के टॉप तीन उत्पादक देशों में अपनी जगह बना लेगा.

मार्केट जानकारों का मानना है कि संगठित क्लस्टर्स, बेहतर प्रोसेसिंग यूनिट्स और टेस्टिंग लैब्स के विस्तार से भारत का हनी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिस रफ्तार से घरेलू उत्पादन और एक्सपोर्ट बढ़ रहा है. उससे उम्मीद है कि भारत जल्द ही दुनिया के टॉप तीन उत्पादक देशों में अपनी जगह बना लेगा.

Published at : 28 Aug 2026 01:05 PM (IST)

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