रेड लेडी पपीते की खासियत इसके बड़े आकार और मीठे स्वाद में छिपी है. इसके एक फल का वजन करीब 2 से 3 किलोग्राम तक हो सकता है. पकने पर इसका गूदा लाल-नारंगी रंग का होता है. अच्छे स्वाद और बड़े आकार की वजह से यह किस्म बाजार में पसंद की जाती है. हालांकि, किसानों को मिलने वाला भाव फल की क्वालिटी और बाजार की मांग पर निर्भर करता है.

रेड लेडी पपीते के पौधों में रोपाई के करीब 5 से 6 महीने बाद फल आने शुरू हो सकते हैं. हालांकि, फल पककर बेचने लायक होने में कुछ और समय लग सकता है. सही देखभाल और अनुकूल मौसम मिलने पर पौधे करीब 2 साल तक फल दे सकते हैं. इस दौरान किसान कई बार पके हुए फल तोड़कर बाजार में बेच सकते हैं.

रेड लेडी पपीते का एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने में करीब 150 रुपये का खर्च आता है. एक पौधे से 600 से 700 रुपये तक की कुल कमाई हो सकती है. हालांकि, यह कमाई तय नहीं है. फल की पैदावार, मंडी का भाव, मजदूरी और दूसरे खर्चों के हिसाब से असली मुनाफा कम या ज्यादा हो सकता है.

रेड लेडी पपीते की खेती में पौधों के बीच सही दूरी रखना जरूरी है. एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच करीब 7 फीट और एक कतार से दूसरी कतार के बीच 8 फीट की दूरी रखें. इससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है. खेत में हवा और धूप भी अच्छी तरह पहुंचती है.

रेड लेडी पपीते के पौधों को बढ़ने और फल देने के लिए सही समय पर खाद-पानी की जरूरत होती है. किसानों को मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के मुताबिक एनपीके खाद देनी चाहिए. खेत में नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा न होने पाए. ज्यादा पानी भरने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए पौधे लगाने से पहले खेत में पानी निकलने की अच्छी व्यवस्था जरूर करें.

पपीते की खेती में वायरस से होने वाली बीमारियां किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं. इसलिए पौधों की पत्तियों और बढ़वार पर नियमित नजर रखें. नीम का तेल कुछ कीटों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे वायरस से संक्रमित पौधा ठीक नहीं होता. अगर पत्तियां मुड़ने लगें, उन पर धब्बे दिखें या पौधे की बढ़वार रुक जाए, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें.
Published at : 25 Oct 2026 04:32 PM (IST)






