How To Protect Wooden Doors From Termites: दरवाजों पर पेंट कराने से पहले अगर आप सिर्फ रंग और फिनिशिंग पर ध्यान देते हैं, तो थोड़ा रुकिए. खासकर घर के मुख्य दरवाजे और लकड़ी के फ्रेम के लिए पेंट करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. दरवाजे और उनका फ्रेम घर की उन लकड़ी की चीजों में शामिल हैं जिन्हें बदलना आसान नहीं होता. मुख्य दरवाजा जमीन के स्तर पर होता है और कई बार उसका फ्रेम फर्श, दीवार या ईंट-पत्थर की सतह के काफी करीब रहता है. ऐसे में दीमक के लिए यहां तक पहुंचना आसान हो सकता है.
दरवाजे के फ्रेम में दीमक लगने का खतरा खासतौर पर तब बढ़ जाता है, जब लकड़ी का संपर्क जमीन या आसपास की चिनाई से सीधे हो. जमीन के अंदर रहने वाली दीमक लकड़ी तक पहुंचने के लिए मिट्टी की सुरंग बना सकती है. दरवाजे का फ्रेम उनके लिए लकड़ी और घर के अंदर पहुंचने का रास्ता दोनों उपलब्ध करा सकता है. इसलिए दरवाजे पर नया पेंट करने से पहले सिर्फ पुराना रंग हटाना या सतह को साफ करना काफी नहीं है.
पेंट से पहले लकड़ी का करें सही इलाज
अगर नया दरवाजा या फ्रेम लगाया जा रहा है, तो ऐसी लकड़ी का इस्तेमाल करना बेहतर है जिसमें दीमक का खतरा कम हो. इसके अलावा फ्रेम को लगाने से पहले सही तरीके से टर्मिटिसाइड ट्रीटमेंट कराना जरूरी है. सिर्फ ऊपर से पेंट कर देने से लकड़ी दीमक से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती. फ्रेम के उन हिस्सों पर भी खास ध्यान देना चाहिए जो बाहर से आसानी से दिखाई नहीं देते. खासकर नीचे का हिस्सा और लकड़ी के कटे हुए किनारे अच्छी तरह सील और फिनिश होने चाहिए. सिर्फ सामने दिखाई देने वाली सतह पर पेंट करने से काम पूरा नहीं होता.
लकड़ी और जमीन के सीधे संपर्क से बचें
दरवाजे के फ्रेम को लगाते समय कोशिश होनी चाहिए कि लकड़ी का सीधा संपर्क मिट्टी या चिनाई से न रहे. जहां संरचना के हिसाब से संभव हो, वहां लकड़ी और आसपास की सतह के बीच दिखाई देने वाला गैप रखना बेहतर होता है. इससे जमीन से लकड़ी तक दीमक के पहुंचने का सीधा रास्ता कम हो सकता है.
अगर घर में पहले से प्री-कंस्ट्रक्शन सॉइल ट्रीटमेंट किया गया है, तो दरवाजे के फ्रेम के आसपास का हिस्सा भी उस ट्रीटमेंट के दायरे में होना चाहिए. सिर्फ घर की नींव के आसपास ट्रीटमेंट कर देना पर्याप्त नहीं है, अगर दरवाजे के आसपास का हिस्सा सुरक्षित नहीं है.
पुराने दरवाजे पर पेंट करने से पहले जांच जरूर करें
अगर आपके घर में दरवाजा पहले से लगा हुआ है और अब उस पर दोबारा पेंट कराया जा रहा है, तो पेंट करने से पहले फ्रेम को ध्यान से जांचें. खासकर नीचे के हिस्से को देखें. कहीं मिट्टी जैसी कोई सुरंग तो नहीं बनी है. दीमक की ऐसी सुरंगें अक्सर फर्श या आसपास की दीवार से शुरू होकर लकड़ी के फ्रेम तक पहुंच सकती हैं.

फ्रेम पर हाथ या किसी हल्की चीज से टैप करके भी देखा जा सकता है. अगर लकड़ी का कोई हिस्सा सामान्य से ज्यादा खोखला सुनाई देता है, तो उसे नजरअंदाज न करें. इसी तरह दरवाजा अचानक ठीक से बंद न हो या बार-बार अटकने लगे, तो इसकी वजह सिर्फ मौसम या लकड़ी का फूलना मानकर आगे न बढ़ें. अंदर से लकड़ी में नुकसान होने पर भी ऐसा हो सकता है. फ्रेम के निचले हिस्से में पेंट का फूलना या उखड़ना भी ध्यान देने वाली बात है. इसे केवल पानी या नमी की समस्या समझकर तुरंत पेंट कर देना सही नहीं है. पहले यह देखना जरूरी है कि लकड़ी के अंदर दीमक की गतिविधि तो नहीं है.
दीमक लग चुकी है तो सिर्फ पेंट न कराएं
अगर पुराने फ्रेम में दीमक के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो उसके ऊपर नया पेंट करा देना समस्या का समाधान नहीं है. पहले यह पता लगाना जरूरी है कि नुकसान कितना है और दीमक वहां तक कैसे पहुंची. शुरुआती स्थिति में स्थानीय स्तर पर ट्रीटमेंट से समस्या को संभाला जा सकता है, लेकिन अगर लकड़ी काफी अंदर तक खराब हो चुकी है, तो फ्रेम बदलना ज्यादा भरोसेमंद विकल्प हो सकता है.
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सिर्फ खराब फ्रेम को निकालकर नया फ्रेम लगा देना भी पर्याप्त नहीं है. अगर दीमक के घर तक पहुंचने का रास्ता या आसपास की मिट्टी में मौजूद कनेक्शन खत्म नहीं किया गया, तो नया लगाया गया फ्रेम भी दोबारा इसकी चपेट में आ सकता है. इसलिए जरूरत पड़ने पर प्रभावित हिस्से के आसपास मिट्टी की ट्रीटमेंट भी देखनी चाहिए. घर का मुख्य और बाहर की तरफ खुलने वाला दरवाजा अंदर के दरवाजों की तुलना में ज्यादा जोखिम में रहता है. इसकी वजह यह है कि यह जमीन के स्तर के करीब होता है और आसपास की मिट्टी या चिनाई के संपर्क में रहने की संभावना ज्यादा होती है.
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