ट्रंप के करीबियों को झटका: ब्राजील में लूला, सर्बिया में छात्रों का परचम, नेतन्याहू का क्या होग

ट्रंप के करीबियों को झटका: ब्राजील में लूला, सर्बिया में छात्रों का परचम, नेतन्याहू का क्या होग


दुनिया की राजनीति में एक के बाद एक बड़े चुनावी घटनाक्रम सामने आए हैं. ब्राजील में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के समर्थक माने जाने वाले दक्षिणपंथी नेता जैर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो राष्ट्रपति चुनाव हार गए हैं. वहीं, सर्बिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों की चुनावी सूची ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के गठबंधन को पीछे छोड़ दिया है.  

दूसरी ओर, ब्राजील के वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतकर वापसी की है. अब दुनिया की नजर इजरायल पर है, जहां 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है.

ब्राजील और सर्बिया के नतीजे बताते हैं कि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता से करीबी या विचारों की समानता चुनाव जीतने की गारंटी नहीं होती. भ्रष्टाचार, सरकार के कामकाज और जनता की नाराजगी जैसे स्थानीय मुद्दे भी चुनाव का रुख बदल सकते हैं. ब्राजील में लूला की जीत और सर्बिया में छात्र आंदोलन की सफलता के बाद इजरायल का चुनाव भी अहम हो गया है. 

ब्राजील में लूला की वापसी, फ्लावियो बोल्सोनारो हारे

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में वर्कर्स पार्टी के नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने जीत दर्ज की है. 80 वर्षीय लूला ने दूसरे चरण के कड़े मुकाबले में लिबरल पार्टी के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया. फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो के बेटे हैं और दक्षिणपंथी राजनीति का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं.

ब्राजील के चुनाव प्राधिकरण के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, लूला को 51.79 प्रतिशत यानी करीब 6.43 करोड़ वोट मिले, जबकि फ्लावियो को 48.21 प्रतिशत यानी करीब 5.98 करोड़ वोट हासिल हुए. इस जीत के साथ लूला का चौथा, गैर-लगातार राष्ट्रपति कार्यकाल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. 

सर्बिया में छात्रों की जीत, वुसिक के गठबंधन को बड़ा झटका

सर्बिया में 25 अक्टूबर को हुए मध्यावधि संसदीय चुनाव में भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलन से जुड़ी ‘स्टूडेंट लिस्ट – स्टूडेंट्स विन’ ने बड़ी जीत दर्ज की है. इस नतीजे से राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) के करीब 14 साल के राजनीतिक दबदबे को बड़ा झटका लगा है. सर्बिया की 250 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 126 सीटें जरूरी हैं.

शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, छात्र समर्थित सूची को 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि वुसिक के गठबंधन को करीब 105 सीटें मिलने का अनुमान है. शुरुआती चुनावी आंकड़ों में छात्र सूची को करीब 52 प्रतिशत और वुसिक के गठबंधन को लगभग 40 प्रतिशत वोट मिले. हालांकि, ये आंकड़े शुरुआती अनुमान हैं, अंतिम नतीजों में बदलाव हो सकता है. 

वुसिक ने अंतिम नतीजे आने से पहले ही हार स्वीकार कर ली. उन्होंने कहा कि शुरुआती आंकड़ों से साफ है कि उनकी सूची चुनाव हार गई है. उनके मुताबिक, छात्र समर्थित सूची को करीब 22 लाख वोट मिले, जबकि उनके गठबंधन को लगभग 17.2 लाख वोट हासिल हुए.

अब इजरायल में नेतन्याहू की परीक्षा

ब्राजील और सर्बिया के बाद अब दुनिया की नजर इजरायल पर है. वहां 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव होने हैं. यह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के  हमले के बाद पहला आम चुनाव है. उस हमले के बाद इजरायल ने गाजा में युद्ध शुरू किया, जो आगे चलकर लेबनान और ईरान से जुड़े संघर्षों तक पहुंचा.

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है. चुनाव से पहले हुए कई सर्वेक्षणों में उनके गठबंधन को बहुमत से दूर दिखाया गया है. हालांकि, इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था में कई दल चुनाव लड़ते हैं और सरकार बनाने के लिए अलग-अलग दलों का समर्थन जरूरी हो सकता है. इसलिए सर्वेक्षणों से यह तय नहीं माना जा सकता कि चुनाव के बाद कौन सरकार बनाएगा. 

नेतन्याहू के खिलाफ नाराजगी क्यों?

7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और नेतन्याहू के नेतृत्व पर सवाल उठे थे. इजरायल के लोगों के बीच हमास, हिजबुल्ला और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को समर्थन मिला है, लेकिन चुनावी सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के नेतृत्व पर भरोसा कम होने के संकेत भी सामने आए हैं.

धर्म और राज्य के संबंधों को लेकर उनकी सरकार की नीतियों से भी कई लोग असहमत हैं. इसके अलावा, नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के मामलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, वह इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं और पहले भी कई राजनीतिक संकटों से बाहर निकल चुके हैं. ऐसे में चुनाव में उनकी स्थिति पर अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे. 

गादी आइजेनकोट भी बड़ी चुनौती

नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट शामिल हैं. हाल के सर्वेक्षणों में उनकी पार्टी को अच्छा समर्थन मिलता दिखाई दिया है. आइजेनकोट के बेटे की गाजा में मौत हुई थी. वह खुद को सुरक्षा के मुद्दों पर सख्त रुख रखने वाले और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था से अलग नेता के रूप में पेश कर रहे हैं.

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