दुनिया में तबाही के पीछे समंदर? महंगाई, रोजगार से लेकर नौकरियों तक पर संकट

दुनिया में तबाही के पीछे समंदर? महंगाई, रोजगार से लेकर नौकरियों तक पर संकट


दुनिया में महंगाई की मार, तेल के दाम, नौकरी और किसानों के दर्द के साथ ही तूफान की तेज हवाएं सबके पीछे कोई एक कारण नजर आता है तो वो है नीला समंदर. समंदर में उठती लहरें अब सिर्फ तटों तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनका असर खेतों, कारखानों से लेकर बाजारों और रोजगार तक पहुंच गया है. 
 
ईरान और अमेरिका की जंग के अलावा सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों की जंग में भी सबसे ज्यादा प्रभावित समंदर से होने वाला व्यापार हुआ है. इसके कारण दुनिया में महंगाई बढ़ रही है, तेल के दाम बढ़ रहे हैं और साथ ही लोगों का अपनी सरकारों के खिलाफ गुस्सा भी बढ़ रहा है. ये गुस्सा सड़कों पर निकल रहा है. पूरा यूरोप इस कारण सड़कों पर है और अपनी सरकारों से मंहगाई के कारण हिंसा पर उतारू हो चुका है.

समंदर और अलनीनो
इसी समंदर के कारण देश और दुनिया का किसान परेशान है. एक तरफ समंदर से उठती गर्म हवाएं जो अलनीनो इफेक्ट पैदा कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर कहीं-कहीं भारी बारिश ने तबाही मचाई है. कहीं सूखे से किसान बेहाल हैं. इस समय आधा भारत राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सूखे की चपेट में है. 

रोजगार पर कैसे पड़ता है असर?
समंदर से व्यापार प्रभावित होने के कारण फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ गई हैं और फसलें भी खराब हो हुई हैं. बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, मजदूरी और किराये की मशीनों का खर्च बढ़ने से मुनाफा कम हो गया है. समंदर से उठने वाले तूफान अमेरिका और तुर्किये के अलावा भारत में भी परेशानी बढ़ा देगा.

इस कारण नौकरीपेशा लोगों पर भी संकट आ गया है. समुद्र से शुरू हुआ संकट नौकरी तक कैसे पहुंचता है तो बता दें कि तूफान, सूखा या समुद्री रास्ता बंद होने के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है. इससे सामान पहुंचने में देरी, लंबा रास्ता, बीमा और माल ढुलाई महंगी होती है. इस कारण कच्चा माल महंगा होता है और ऊर्जा भी महंगी हो जाती है, जिसके बाद तेल, गैस, उर्वरक और उद्योगों की लागत बढ़ती है.

इन सबके चलते कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ता है, जिससे उन्हें मजबूरन उत्पादन घटाना, कीमत बढ़ाना या निवेश रोकना पड़ सकता है. आम आदमी और रोजगार पर भी असर पड़ने लगता है. इन सबके चलते ही महंगाई बढ़ती है और काम के घंटे कम होने के कारण नई भर्तियों में कमी या छंटनी होने लगती है.

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